Patna: बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार जारी है। पटना के कंकड़बाग स्थित पीसी कॉलोनी में एक दवा की दुकान से शराब और बीयर की बोतलें मिलने का मामला सामने आया है। राज्य औषधि नियंत्रक की टीम ने शुक्रवार को औचक निरीक्षण के दौरान दुकान में कई अनियमितताएं पकड़ीं। जांच में एक्सपायर दवाएं भी मिलीं। इसके बाद पुलिस और उत्पाद विभाग को सूचना दी गई। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दुकान के मुख्य द्वार को सील कर दिया गया है।
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दवा की दुकान में छापेमारी, अंदर मिला शराब का भंडार
मामला पीसी कॉलोनी के डी-167 स्थित मेसर्स सेलुलस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड का है। शुक्रवार को राज्य औषधि नियंत्रक की टीम ने कंकड़बाग थाने की पुलिस के साथ प्रतिष्ठान का औचक निरीक्षण किया। उस समय दुकान के मालिक मृत्युंजय कुमार सिंह परिसर में मौजूद थे। जांच के दौरान अधिकारियों ने दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज मांगे। हालांकि, प्रतिष्ठान की ओर से आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके अलावा दुकान पर लाइसेंस की शर्तों के अनुरूप साइनबोर्ड भी नहीं मिला। जांच टीम को दवाओं के भंडारण की व्यवस्था में भी खामियां मिलीं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने इन अनियमितताओं को गंभीरता से लिया।
एक कमरे का लाइसेंस, चार कमरों में रखी थीं दवाएं
औषधि विभाग की जांच में पता चला कि प्रतिष्ठान के पास केवल एक कमरे के लिए ड्रग लाइसेंस था, जबकि दवाएं चार कमरों में रखी गई थीं। इस तरह दवाओं के भंडारण को लेकर लाइसेंस की शर्तों के पालन पर सवाल खड़े हो गए। जांच के दौरान दो एक्सपायर दवाएं जब्त की गईं। इसके साथ ही सात अलग-अलग दवाओं के नमूने भी लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा। औषधि विभाग ने प्रतिष्ठान संचालक को पांच दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। विभाग दवाओं के रखरखाव और कारोबार से जुड़ी अनियमितताओं की भी जांच कर रहा है।
शराब और बीयर की बोतलें मिलने से मचा हड़कंप
निरीक्षण के दौरान दवा की दुकान के अंदर शराब और बीयर की बोतलें मिलने से मामला और गंभीर हो गया। दवाओं की जांच करने पहुंची टीम को परिसर में शराब भी मिली, जिसके बाद अधिकारियों ने तत्काल पुलिस और उत्पाद विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शराब से जुड़े मामले में कार्रवाई शुरू की। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही दुकान के मुख्य द्वार को सील कर दिया गया। हालांकि, शराब की बोतलें वहां कब से रखी गई थीं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था, इस बारे में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
शराबबंदी के बीच दवा दुकान में शराब कैसे पहुंची?
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद शराब के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस और उत्पाद विभाग कार्रवाई करते हैं। इसके बावजूद शराब की बरामदगी के मामले सामने आते रहते हैं। पटना की इस घटना में अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दवा की दुकान में शराब कैसे पहुंची और क्या वहां से इसकी बिक्री भी की जाती थी। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि शराब किसी स्थानीय स्तर के कारोबार का हिस्सा थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
ड्रग विभाग और पुलिस की अलग-अलग जांच
इस मामले में औषधि विभाग दवाओं के भंडारण, लाइसेंस और रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच कर रहा है। वहीं, पुलिस और उत्पाद विभाग शराब की बरामदगी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। फिलहाल तीन लोगों की गिरफ्तारी और दुकान सील किए जाने के बाद जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों की जांच से ही स्पष्ट होगा कि प्रतिष्ठान में शराब का कथित अवैध कारोबार कब से चल रहा था और इसमें अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं।




