झारखंड में डॉक्टरों का बड़ा ऐलान! 21 अक्टूबर तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो 22 से संपूर्ण कार्य बहिष्कार

झारखंड में डॉक्टरों ने सरकार को 21 अक्टूबर तक मांगों पर कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार होगा।
झारखंड में डॉक्टरों का बड़ा ऐलान
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Ranchi: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों से जुड़े लंबित मुद्दों को लेकर जॉइंट मेडिकल मूवमेंट ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मंच ने राज्य सरकार को 21 अक्टूबर 2026 तक मांगों पर ठोस कार्रवाई करने का समय दिया है। निर्धारित समय तक समाधान नहीं होने पर 22 अक्टूबर से सरकारी और गैर-सरकारी डॉक्टरों के संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

सरकार के सामने रखा कॉमन मिनिमम प्रोग्राम

जॉइंट मेडिकल मूवमेंट ने डॉक्टरों से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम और जॉइंट एक्शन प्लान तैयार किया है। मंच की ओर से इसकी प्रतियां मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को सौंपी गई हैं। इसके अलावा संबंधित दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भी सरकार तक भेजे गए हैं। मंच का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से लंबित हैं। इनका समाधान होने से न केवल डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा, बल्कि मरीजों को भी सुरक्षित और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

डॉक्टरों की सुरक्षा और करियर से जुड़े मुद्दे प्रमुख

जॉइंट मेडिकल मूवमेंट की प्रमुख मांगों में डॉक्टरों की सुरक्षा, सम्मानजनक कार्य वातावरण और सेवा से जुड़े कैडर सुधार शामिल हैं। मंच ने DACP और Dynamic ACP लागू करने की मांग भी सरकार के सामने रखी है। इसके साथ ही Clinical Establishment Act में जरूरी बदलाव और आयुष्मान भारत तथा PM-JAY से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की मांग की गई है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

  • डॉक्टरों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य माहौल उपलब्ध कराया जाए।
  • DACP और Dynamic ACP लागू किया जाए।
  • Clinical Establishment Act में जरूरी संशोधन किए जाएं।
  • आयुष्मान भारत और PM-JAY से जुड़े मामलों का समाधान हो।
  • जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की समस्याएं दूर की जाएं।
  • डेंटल डॉक्टरों से जुड़े मुद्दों पर भी कार्रवाई की जाए।
  • चिकित्सा संबंधी कार्यों के लिए Single Window System बनाया जाए।
  • सरकार और डॉक्टरों के बीच नियमित Health Monitoring System शुरू किया जाए।

चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी

मंच ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन को एक साथ सीधे कार्य बहिष्कार तक नहीं ले जाया जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसके तहत राज्यभर में जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ डॉक्टर Black Badge कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रेस कॉन्फ्रेंस, जिला स्तर पर बैठकें और जनसंपर्क अभियान के जरिए डॉक्टर अपनी मांगों को लोगों तक पहुंचाएंगे। आंदोलन के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार और आम लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी।

21 अक्टूबर को राज्यभर में प्रदर्शन

जॉइंट मेडिकल मूवमेंट के कार्यक्रम के अनुसार 21 अक्टूबर को राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। यह सरकार के लिए मांगों पर कार्रवाई करने की तय समयसीमा का अंतिम दिन होगा। मंच ने चेतावनी दी है कि अगर 21 अक्टूबर तक सरकार की ओर से मांगों पर ठोस पहल नहीं होती है, तो 22 अक्टूबर से सरकारी और गैर-सरकारी डॉक्टर संपूर्ण कार्य बहिष्कार पर जाएंगे।

आंदोलन का उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार

जॉइंट मेडिकल मूवमेंट ने साफ किया है कि उसका आंदोलन किसी व्यक्ति या किसी विशेष संस्था के खिलाफ नहीं है। मंच का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाना और मरीजों को सुरक्षित एवं बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। हालांकि, यदि कार्य बहिष्कार की स्थिति बनती है तो इसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में अब निगाहें सरकार की ओर हैं कि 21 अक्टूबर की समयसीमा से पहले डॉक्टरों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है।

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