PM Awas Yojana Scam: प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से डिजिटल रिकॉर्ड और सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद बिहार के जमुई जिले से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चकाई प्रखंड के छह परिवारों ने बिहार और झारखंड, दोनों राज्यों में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लिया। जांच में सामने आया कि इन परिवारों ने बिहार के चकाई में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (PMAY-G) के तहत सहायता ली, जबकि झारखंड के देवघर में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना (PMAY-U) का लाभ भी प्राप्त किया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सरकारी राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नेशनल मॉनिटरिंग टीम की जांच में खुला मामला
यह मामला प्रधानमंत्री आवास योजना की नेशनल मॉनिटरिंग टीम की देशव्यापी जांच के दौरान सामने आया। जांच के बाद चकाई प्रखंड प्रशासन को संबंधित लाभुकों से योजना के तहत मिली राशि वापस लेने का निर्देश दिया गया। इसके बाद चकाई के बीडीओ मनीष आनंद ने 18 सितंबर को संबंधित पंचायतों के आवास सहायकों को पत्र जारी कर वसूली की कार्रवाई तेज करने को कहा। साथ ही वसूल की गई रकम को राज्य खाते में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। जांच में छह पंचायतों से जुड़े लाभुकों के नाम सामने आए हैं।
इन छह मामलों में सामने आया दोहरी योजना का लाभ
- विनोद राय — चंद्रमंडीह पंचायत
- सुगिया देवी — माधोपुर पंचायत
- सांझा देवी — डढ़वा पंचायत
- राधा देवी — कल्याणपुर पंचायत
- प्रभा देवी — रामसिंहडीह पंचायत
- राजेंद्र राम — कियाजोरी पंचायत
प्रशासन के अनुसार, इन सभी मामलों में बिहार के चकाई और झारखंड के देवघर से आवास योजना की सहायता मिलने की जानकारी सामने आई है।
छह मामलों में अब तक सिर्फ एक से हुई वसूली
प्रशासन ने सरकारी राशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू तो कर दी है, लेकिन अभी तक छह मामलों में केवल एक लाभुक से 45 हजार रुपये की वसूली हो सकी है। बाकी पांच मामलों में राशि वापस लिया जाना बाकी है। बीडीओ की ओर से संबंधित आवास सहायकों को निर्देश दिया गया है कि सभी लाभुकों को नोटिस जारी कर योजना की राशि जमा कराई जाए। यदि नोटिस के बावजूद राशि वापस नहीं की जाती है, तो आगे कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
तीन नोटिस के बाद होगी सर्टिफिकेट केस की कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लाभुकों को राशि वापस करने के लिए नोटिस दिए जाएंगे। तीन नोटिस के बाद भी अगर सरकारी रकम जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित लाभुक के खिलाफ सर्टिफिकेट केस दर्ज किया जा सकता है। इससे साफ है कि प्रशासन अब सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सरकारी धन की रिकवरी को लेकर आगे की प्रक्रिया भी शुरू करेगा।
आधार और डिजिटल रिकॉर्ड के बावजूद कैसे मिली दो जगह सहायता?
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू योजना की निगरानी व्यवस्था से जुड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभुकों की पहचान और बैंक खाते सहित कई जानकारियां डिजिटल सिस्टम में दर्ज की जाती हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिहार और झारखंड में अलग-अलग स्तर पर हुए सत्यापन के दौरान एक ही परिवार का नाम दोनों योजनाओं में कैसे दर्ज हो गया। स्थानीय स्तर पर लाभुकों के चयन और सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान भी यह जानकारी सामने नहीं आई। अब मामला सामने आने के बाद सरकारी राशि की वसूली के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि दोनों राज्यों में हुए सत्यापन की प्रक्रिया में यह चूक किस स्तर पर हुई।
जरूरतमंदों के बीच योजना की पारदर्शिता पर सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, जो वास्तव में आवास की जरूरत रखते हैं। ऐसे में एक ही परिवार को दो राज्यों से योजना का लाभ मिलने की घटना से लाभुकों के चयन और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इस मामले में संबंधित परिवारों की ओर से दो राज्यों में लाभ लेने के पीछे क्या कारण था, यह प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रशासन का फोकस सरकारी राशि की वसूली पर है। राज्य स्तर से अलग-अलग राज्यों में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने वाले लाभार्थियों की सूची प्रखंड को उपलब्ध कराई गई है। इसी सूची के आधार पर अब चकाई प्रखंड में कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। यह मामला सिर्फ छह परिवारों से सरकारी राशि की वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि कल्याणकारी योजनाओं में डिजिटल रिकॉर्ड होने के बावजूद अलग-अलग राज्यों के बीच डेटा मिलान और सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है।




