रांची: झारखंड में JPSC और JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर सोमवार से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया। भाजपा की प्रमुख मांग है कि परीक्षा में हुई कथित अनियमितता की सीबीआई जांच कराई जाए और आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
आंदोलन के पहले दिन रांची समेत कई जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डीसी और एसपी कार्यालयों का घेराव किया।
रांची में भाजपा का जोरदार प्रदर्शन
राजधानी रांची में जिला स्कूल शहीद चौक से भाजपा ने जुलूस निकाला। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता समाहरणालय पहुंचे। यहां कार्यकर्ताओं ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में रांची विधायक सीपी सिंह, हटिया विधायक नवीन जायसवाल, पूर्व सांसद दीपक प्रकाश और रांची मेयर रोशनी खलखो सहित कई भाजपा नेता शामिल हुए।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर कार्रवाई की गई। पार्टी ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए।
दूसरे जिलों में भी दिखा विरोध
भाजपा का प्रदर्शन केवल रांची तक सीमित नहीं रहा। दुमका में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, हजारीबाग में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, जमशेदपुर में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और गढ़वा में केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने आंदोलन की अगुवाई की।
इन जिलों में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर जिला प्रशासन के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया।
8 से 11 सितंबर तक चलेगा आंदोलन
भाजपा का यह आंदोलन 8 से 11 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान राज्य के सभी 24 जिलों में समाहरणालय और डीसी-एसपी कार्यालयों के घेराव का कार्यक्रम है।
पार्टी ने अलग-अलग जिलों में अपने वरिष्ठ नेताओं को आंदोलन की जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा का कहना है कि JPSC और JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितता की सीबीआई जांच और छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी को लेकर वह सरकार पर दबाव बनाएगी।
आंदोलन के जरिए भाजपा ने साफ कर दिया है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी और छात्र आंदोलन का मुद्दा फिलहाल झारखंड की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बना रहेगा।


