Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में अवैध खनन, ओवरलोडिंग और बालू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की खनिज संपदा अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण करते हुए पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। इससे राजस्व वृद्धि के साथ स्थानीय लोगों के हितों की भी रक्षा होगी।
मुख्यमंत्री बुधवार को झारखंड मंत्रालय में खान एवं भू-तत्व विभाग तथा भवन निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान विभागों की विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और लंबित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
अवैध बालू खनन पर सख्ती, तकनीक आधारित निगरानी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अवैध बालू खनन पर चिंता जताते हुए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से राज्य को राजस्व हानि होती है और पर्यावरणीय संतुलन व कानून-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
बैठक में बताया गया कि राज्य में कुल 820 बालू घाट हैं। इनमें 376 कैटेगरी-1 घाटों से पंचायतों के माध्यम से बालू उठाव हो रहा है, जबकि 444 कैटेगरी-2 घाटों में से 300 घाटों का ऑक्शन पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन घाटों की नीलामी हो चुकी है, वहां जल्द बालू उठाव शुरू कराया जाए और शेष घाटों की नीलामी प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी की जाए।
उन्होंने मशीनों से बालू उठाव पर रोक संबंधी आदेश की समीक्षा कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने तथा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के संयुक्त अभियान के माध्यम से नियमित निरीक्षण और सघन निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
बंद पड़ी खदानों की होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल की बंद पड़ी खदानों की समीक्षा करते हुए कहा कि जहां उत्पादन बंद है, वहां उत्पादन पुनः शुरू कराया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो लीज निरस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाए।
उन्होंने निर्देश दिया कि जिन खनिज ब्लॉकों का ऑक्शन हो चुका है लेकिन वे लंबे समय से निष्क्रिय हैं, उनकी समीक्षा कर आवश्यकतानुसार निरस्त किया जाए और नए राजस्व आकलन के बाद पुनः नीलामी की जाए। साथ ही कार्यरत और गैर-कार्यरत खनन क्षेत्रों की मैपिंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
स्वर्ण उत्पादन बढ़ाने पर जोर
बैठक में राज्य की सात संचालित स्वर्ण खदानों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में इन खदानों से लगभग 20 किलोग्राम वार्षिक स्वर्ण उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए बाधाओं की पहचान कर उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
उन्होंने संभावित नए स्वर्ण खदान क्षेत्रों के शीघ्र ऑक्शन की प्रक्रिया तेज करने तथा गोल्ड माइनिंग सेक्टर में तकनीकी उन्नयन, निवेश आकर्षित करने और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर विशेष बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में स्वर्ण भंडार की पर्याप्त संभावनाएं हैं और योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर इस क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकता है।
जेएसएमडीसी और जेएमईसीएल को मजबूत बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (जेएसएमडीसी) और झारखंड माइनिंग एंड एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड (जेएमईसीएल) के लिए अधिक से अधिक खनिज क्षेत्र आरक्षित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
इसके अलावा जेएमईसीएल में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने तथा दोनों संस्थाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
निर्माण परियोजनाएं समय पर पूरी हों
भवन निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी भवन एवं आधारभूत संरचना परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विभिन्न सरकारी कार्यालयों, आवासीय परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य भवनों के निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा आधुनिक एवं टिकाऊ निर्माण तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन और आधारभूत संरचना विकास राज्य की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार हैं। इन क्षेत्रों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित कर झारखंड को विकास की नई दिशा दी जा सकती है।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा, भूतत्व निदेशक कुमार अमिताभ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



