Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच अब क्राउड फंडिंग से जुटाई गई रकम जांच के दायरे में आ गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024-25 और 2026 के दौरान आंदोलन के नाम पर आर्थिक सहयोग जुटाने के लिए अलग-अलग माध्यमों और QR कोड का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत मिली है। सूत्रों के अनुसार, स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट और जांच एजेंसी को प्राप्त शिकायत के आधार पर इस पूरे वित्तीय लेन-देन की पड़ताल शुरू की जा रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि पैसा कहां से आया, किन खातों में जमा हुआ और बाद में उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। हालांकि, अभी यह जांच प्रारंभिक स्तर पर है और क्राउड फंडिंग की पूरी राशि अथवा उसके इस्तेमाल को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
2024-25 में करीब एक करोड़ रुपये जुटाने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में JSSC-CGL से जुड़े छात्र आंदोलन के दौरान आर्थिक सहयोग के नाम पर क्राउड फंडिंग के जरिए करीब एक करोड़ रुपये जुटाए जाने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी अब यह जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है कि इस राशि में किन-किन लोगों ने आर्थिक सहयोग किया था। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि रकम किन बैंक खातों में पहुंची और बाद में किन मदों में खर्च की गई। जांच के दौरान फंडिंग के स्रोत और खर्च के बीच संबंध की भी पड़ताल की जा रही है।
2026 में भी QR कोड के जरिए फंड जुटाने का दावा
JPSC और JSSC से जुड़े मामलों में कार्रवाई और परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर वर्ष 2026 में भी छात्रों की ओर से आंदोलन किए गए थे। इस दौरान जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई दिनों तक धरना दिए जाने की बात सामने आई है। इसी दौरान आंदोलन के लिए आर्थिक सहयोग की अपील करते हुए अलग-अलग QR कोड जारी किए जाने का दावा किया गया है। शिकायत में करीब 85 लाख रुपये जुटाए जाने का उल्लेख है। जांच एजेंसी को मिली शिकायत में मनीष कुमार और बृजभूषण किशोर अग्रवाल समेत कुछ अन्य लोगों से जुड़े QR कोड का भी उल्लेख होने की बात कही जा रही है।
किन खातों में पहुंची रकम, इसकी भी होगी पड़ताल
शिकायत में अमित कुमार के नाम से बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मनीष कुमार के नाम से QR कोड और बृजमोहन प्रसाद अग्रवाल के नाम से भी QR कोड जारी किए जाने का दावा किया गया है। जांच का एक अहम बिंदु यह है कि आंदोलन के नाम पर जुटाई गई राशि किसी पंजीकृत छात्र संगठन के आधिकारिक खाते में गई या अलग-अलग व्यक्तिगत खातों में जमा हुई।
धमकी भरे संदेशों की भी जांच के दायरे में आने की बात
शिकायत से जुड़े विवरणों के अनुसार, आंदोलन के दौरान कुछ लोगों को कथित तौर पर धमकी दिए जाने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश प्रसारित किए जाने की भी बात सामने आई है। यदि जांच में इन घटनाओं का वित्तीय लेन-देन या आंदोलन से कोई संबंध सामने आता है, तो एजेंसियां उस पहलू को भी जांच का हिस्सा बना सकती हैं। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
छात्र संगठनों में मतभेद के बाद शिकायत का दावा
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में छात्र संगठनों के बीच मतभेद सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय और CID तक कुछ शिकायतें और गोपनीय सूचनाएं पहुंची हैं। इन्हीं शिकायतों और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर क्राउड फंडिंग से जुड़े लेन-देन की जांच शुरू होने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले यह कहना जल्दबाजी होगी कि जुटाई गई राशि का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि में हुआ या नहीं।
CID पहले से JPSC-JSSC मामलों की जांच कर रही है
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच पहले से CID के स्तर पर चल रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच में परीक्षा से संबंधित गड़बड़ियों और उससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई भी हुई है। अब यदि क्राउड फंडिंग की शिकायत की जांच इसी प्रक्रिया से जुड़ती है, तो वित्तीय लेन-देन का पहलू भी जांच के दायरे में आ सकता है। जांच एजेंसी के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जुटाई गई रकम का वास्तविक स्रोत और इस्तेमाल क्या था। क्राउड फंडिंग, व्यक्तिगत खातों में रकम आने और उसके कथित इस्तेमाल से जुड़े उपरोक्त बिंदु शिकायत/जांच से जुड़े दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।




