Ranchi : हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में हर तिथि का अपना विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक चंद्र मास शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित होता है। इन्हीं में कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में दशमी को ‘पूर्णा तिथि’ की श्रेणी में रखा गया है। मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए धार्मिक और शुभ कार्य पूर्णता की ओर बढ़ते हैं।
धर्म, सत्य और आत्मचिंतन का दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशमी तिथि के देवता धर्म अथवा यमराज माने जाते हैं। इसलिए यह तिथि सत्य, न्याय, धर्म और अनुशासन के पालन का संदेश देती है।
कृष्ण पक्ष में चंद्रमा की कलाएं धीरे-धीरे घटती हैं। इसी कारण इस अवधि को आत्मचिंतन, मानसिक शुद्धि और नकारात्मक विचारों से मुक्ति के लिए अनुकूल माना जाता है।
कृष्ण पक्ष की दशमी एकादशी व्रत से एक दिन पहले आती है। वैष्णव परंपरा में इसका विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत की तैयारी दशमी तिथि से ही शुरू कर दी जाती है और इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
दशमी तिथि पर क्या करें?
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा: सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। धूप, दीप, पीले फूल और तुलसी पत्र अर्पित करने के साथ ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप शुभ माना जाता है।
दान और सेवा: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और तिल का दान करना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य भी किए जा सकते हैं।
सात्विक जीवनशैली: इस दिन सात्विक भोजन करने, क्रोध और विवाद से बचने तथा मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में तामसिक भोजन से परहेज करने की बात कही गई है।
ज्योतिष में दशमी का महत्व
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दशमी एक ‘पूर्ण तिथि’ है, इसलिए इसे कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा से जुड़े कार्य और नए काम की शुरुआत के लिए भी इसे शुभ माना जाता है।
हालांकि किसी विशेष कार्य के लिए शुभ मुहूर्त तय करते समय केवल तिथि ही नहीं, बल्कि वार, नक्षत्र, योग और स्थानीय पंचांग को भी ध्यान में रखा जाता है।
कुल मिलाकर, कृष्ण पक्ष की दशमी को धार्मिक मान्यताओं में आत्मचिंतन, संयम, साधना और सकारात्मक बदलाव के लिए महत्वपूर्ण दिन माना गया है।










