JPSC नियुक्तियों में देरी से बढ़ी परेशानी, अभ्यर्थियों का भविष्य और शिक्षकों की प्रोन्नति दांव पर

JPSC संकट से झारखंड में 30 से अधिक परीक्षाएं प्रभावित हैं। अध्यक्ष-सदस्यों के इस्तीफे के बाद शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी, हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट।
झारखंड लोक सेवा
Advertisement

रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में नेतृत्व का संकट अब राज्य की उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भारी पड़ने लगा है। आयोग के अध्यक्ष और तीनों सदस्यों के इस्तीफे के बाद पिछले कई महीनों से महत्वपूर्ण प्रशासनिक और परीक्षा संबंधी कार्य प्रभावित हैं। इसका सीधा असर विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की प्रोन्नति से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद आयोग में नई नियुक्तियां नहीं होने से संकट और गहरा गया है। स्थिति यह है कि शिक्षकों की प्रोन्नति की प्रक्रिया अटकी हुई है और कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आयोग में जल्द नियुक्तियां नहीं हुईं, तो लंबित मामलों का बोझ और बढ़ सकता है।

JPSC में नियुक्तियां नहीं होने पर हाईकोर्ट नाराज

झारखंड हाईकोर्ट ने आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली रहने पर राज्य सरकार के प्रति नाराजगी जताई थी। अदालत ने 10 सितंबर 2026 को सरकार को दो महीने के भीतर इन पदों पर नियुक्तियां करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होने का मामला अब भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 18 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को निर्धारित है। आयोग में नेतृत्व का संकट जुलाई और अगस्त 2026 में शुरू हुआ था। सीआईडी जांच के सिलसिले में तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को इस्तीफा दिया था। इसके बाद तीनों सदस्यों डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने 9 अगस्त 2026 को अपने पद छोड़ दिए थे। तब से आयोग में नियमित कामकाज प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। अध्यक्ष और सदस्यों की अनुपस्थिति में कई महत्वपूर्ण निर्णयों तथा प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विश्वविद्यालय के शिक्षकों की प्रोन्नति पर लगा ब्रेक

JPSC संकट का सबसे बड़ा असर झारखंड के विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की प्रोन्नति पर पड़ा है। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों को अब आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, 2008 बैच के कई असिस्टेंट प्रोफेसर अब तक अपनी पहली प्रोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। स्टेज-1 से स्टेज-2 में प्रोन्नति के करीब 100 मामले लंबित बताए जा रहे हैं। इनमें लगभग 60 शिक्षक ऐसे भी हैं, जिनके मामले सीबीआई जांच के दायरे में हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि प्रोन्नति की प्रक्रिया समय पर पूरी होती, तो 2008 बैच के कई शिक्षक वर्ष 2023 तक प्रोफेसर के पद तक पहुंच सकते थे। प्रोन्नति में देरी का असर केवल पदनाम तक सीमित नहीं है। इससे शिक्षकों के वेतनमान, एरियर और अन्य वित्तीय लाभ भी प्रभावित हो रहे हैं। पात्र शिक्षकों को प्रोन्नति का लाभ वास्तविक प्रभावी तिथि से मिलने की प्रक्रिया भी लंबित मामलों के कारण प्रभावित हो सकती है।

30 से अधिक परीक्षाओं पर अनिश्चितता

आयोग में नियुक्तियां नहीं होने से प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर भी प्रभावित हो रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले नौ परीक्षाएं स्थगित की गई थीं, जबकि 21 अन्य परीक्षाओं को रद्द किए जाने से अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है। लंबित या प्रभावित परीक्षाओं में कई महत्वपूर्ण भर्ती और पात्रता परीक्षाएं शामिल हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रेगुलर 2025
  • संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025
  • सिविल जज परीक्षा
  • सहायक लोक अभियोजक (APP) परीक्षा
  • फैक्ट्री इंस्पेक्टर परीक्षा
  • प्रोजेक्ट मैनेजर परीक्षा
  • बॉयलर इंस्पेक्टर परीक्षा
  • यूनिवर्सिटी ऑफिसर परीक्षा
  • झारखंड पात्रता परीक्षा

इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ी समस्या समयसीमा और भविष्य की योजना को लेकर है। परीक्षा की तारीखों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं होने से उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती है। सरकार की ओर से इन परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने की घोषणा की गई थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कमेटी के गठन और आगे की कार्रवाई को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

कुलपति और प्रतिकुलपति बनने के अवसर भी प्रभावित

JPSC में प्रोन्नति संबंधी प्रक्रियाएं लंबित रहने का असर विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षकों पर भी पड़ सकता है। विश्वविद्यालयों में कुलपति (VC) और प्रतिकुलपति (Pro-VC) जैसे पदों के लिए निर्धारित पात्रता में प्रोफेसर के रूप में आवश्यक अनुभव महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में समय पर प्रोन्नति नहीं मिलने से कुछ शिक्षकों के लिए इन पदों की पात्रता हासिल करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, प्रोन्नति की प्रक्रिया लंबी खिंचने के दौरान सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के मामलों में अतिरिक्त प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसका प्रभाव विश्वविद्यालयों में नेतृत्व के लिए उपलब्ध अनुभवी शिक्षकों के अवसरों पर भी पड़ने की आशंका है।

सरकार के सामने आयोग को पटरी पर लाने की चुनौती

JPSC में लंबे समय से खाली पड़े पदों का असर अब एक साथ कई क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रतियोगी परीक्षाओं का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी परेशान हैं, तो दूसरी ओर विश्वविद्यालयों के शिक्षक प्रोन्नति और वित्तीय लाभ के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आयोग में जल्द नियुक्तियां करने और लंबित प्रक्रियाओं को गति देने की है। हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा भी नजदीक है। अब देखना होगा कि सरकार नियुक्तियों और लंबित परीक्षाओं को लेकर क्या कदम उठाती है। आयोग में नियमित नेतृत्व बहाल होने के बाद ही लंबित मामलों के निपटारे और परीक्षा प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद की जा सकती है।

Also Read: रांची में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का खुलासा, युवती समेत 6 गिरफ्तार; पैंट्री कार से होती थी नशे की सप्लाई

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी-अभी.