Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने नशे के अवैध कारोबार से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह गिरोह ट्रेनों की पैंट्री कार में काम करने वाले कर्मचारियों के जरिए नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाने का तरीका अपनाता था। मामले में एनसीबी ने छापेमारी कर एक युवती समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान कोकीन, एमडीएमए, गांजा और एक कार भी जब्त की गई है। जांच एजेंसी अब गिरोह के नेटवर्क, नशे की सप्लाई के रास्तों और संभावित विदेशी संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
रांची ड्रग्स सिंडिकेट में छह आरोपी गिरफ्तार
एनसीबी की कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रजत जैन, उदित कुमार, आकाश मल्होत्रा, स्नेहा पासवान, मिलन सिंह और ऋषभ जैन के रूप में हुई है। इनमें रांची, गिरिडीह और जमशेदपुर के निवासी शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चार आरोपियों को 14 अक्टूबर, मिलन सिंह को 15 अक्टूबर और ऋषभ जैन को इसके बाद गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। जांच एजेंसी अब उनसे पूछताछ के जरिए गिरोह के दूसरे सदस्यों और नशीले पदार्थों की सप्लाई से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाने की तैयारी कर रही है। जांच में सामने आए शुरुआती तथ्यों के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क रांची और जमशेदपुर के अलावा जयपुर और दिल्ली तक फैला हुआ था। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नशीले पदार्थ कहां से मंगाए जाते थे और उन्हें अलग-अलग शहरों में किन लोगों तक पहुंचाया जाता था।
ट्रेन की पैंट्री कार से नशे की सप्लाई का आरोप
इस मामले में सबसे अहम पहलू ट्रेनों की पैंट्री कार के कर्मचारियों के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। जांच एजेंसी को आशंका है कि गिरोह नशीले पदार्थों की आवाजाही के लिए रेल नेटवर्क का सहारा लेता था। यदि जांच में यह तरीका प्रमाणित होता है, तो इससे नशे की तस्करी के लिए परिवहन व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला सामने आ सकता है। फिलहाल, एनसीबी इस बात की जांच कर रही है कि सप्लाई चेन में किन लोगों की भूमिका थी और नशीले पदार्थों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए कौन-कौन से रास्ते अपनाए जाते थे।
विदेशी नंबरों से संपर्क, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच
जांच के दौरान एक आरोपी के विदेशी मोबाइल नंबरों के संपर्क में रहने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इसके आधार पर एजेंसी गिरोह के संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। थाइलैंड, नाइजीरिया, ब्रिटेन और अमेरिका से जुड़े संभावित संपर्कों की चर्चा है, लेकिन इन देशों से गिरोह का सीधा संबंध अभी जांच के दायरे में है। इसे फिलहाल प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। मामले में रांची के मोरहाबादी और कांके रोड स्थित एक रेस्टोरेंट के मालिक को 26 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच किसी तरह का संपर्क या लेन-देन था या नहीं। बताया जा रहा है कि दिल्ली में की गई छापेमारी से मिले इनपुट के आधार पर रांची और जमशेदपुर में भी कार्रवाई की गई।
कोकीन, एमडीएमए और गांजा समेत कार जब्त
एनसीबी की कार्रवाई के दौरान नशीले पदार्थों की अलग-अलग खेप बरामद की गई। जब्त सामान में शामिल हैं:
- कोकीन: 18 ग्राम
- एमडीएमए (MDMA): 16.5 ग्राम
- गांजा: 3.5 ग्राम
- कार: हुंडई एक्सेंट, रजिस्ट्रेशन नंबर JH 01 CA 0936
जांच एजेंसी बरामद नशीले पदार्थों के स्रोत और उनके संभावित खरीदारों का पता लगाने में जुटी है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों के पास से मिली सामग्री किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी या अलग-अलग स्तरों पर नशीले पदार्थों की आपूर्ति की जा रही थी।
रांची में कथित रेव पार्टियों पर भी जांच की नजर
इस कार्रवाई के बाद रांची में निजी फार्म हाउसों, घरों और अन्य स्थानों पर आयोजित होने वाली कथित रेव पार्टियों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल का मुद्दा भी चर्चा में है। ऐसी पार्टियों में कोकीन और सिंथेटिक ड्रग्स की आपूर्ति की आशंका की जांच की जा सकती है। हालांकि, किसी आयोजन या व्यक्ति को ड्रग्स कारोबार से जोड़ने के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं। फिलहाल, इस मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कथित सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क और उसकी सप्लाई चेन का पता लगाना है।
आगे की जांच में खुल सकते हैं कई राज
रांची में एनसीबी की इस कार्रवाई से नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिशों को अहम माना जा रहा है। अब जांच के केंद्र में नशीले पदार्थों की खरीद, परिवहन, वितरण और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्क हैं। आने वाले दिनों में पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गिरोह से जुड़े और लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, विदेशी नेटवर्क और रेव पार्टियों से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।



