Ranchi : राज्य के मंत्री हफीजुल हसन द्वारा शरिया कानून को भारतीय संविधान से ऊपर बताने संबंधी बयान पर जनजाति सुरक्षा मंच युवा प्रकोष्ठ के नेता सन्नी उरांव ने तीव्र आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि भारत में संविधान सर्वोपरि है, और जो लोग शरिया को संविधान से ऊपर मानते हैं, उन्हें उसी देश में जाना चाहिए जहाँ शरिया कानून लागू है। बिरसा मुंडा और डॉ. भीमराव अंबेडकर की धरती पर शरिया या उसकी सोच के लिए कोई जगह नहीं है।
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सन्नी उरांव ने झामुमो पार्टी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि हफीजुल हसन को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह मांग पूरी नहीं होती है, तो सभी आदिवासी और दलित संगठन मिलकर जोरदार आंदोलन करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का सवाल है।



