भागलपुर: भागलपुर जिले में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट से बाढ़ प्रभावित लोगों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि, पानी कम होने के साथ ही नवगछिया अनुमंडल के कई इलाकों में बाढ़ से हुई तबाही की तस्वीर साफ नजर आने लगी है। टूटे मकान, क्षतिग्रस्त सड़कें, बर्बाद फसलें और दूषित पेयजल ने प्रभावित लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में जनजीवन को दोबारा पटरी पर लाना है।
नवगछिया के रंगरा, गोपालपुर, खरीक और बिहपुर प्रखंडों में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में बांध टूटने के कारण पानी तेज गति से गांवों में घुसा, जिससे बड़ी संख्या में कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए। पानी उतरने के बाद इन इलाकों में राहत और पुनर्वास की जरूरत और स्पष्ट हो गई है।
तीन जगह बांध टूटने से भारी नुकसान
राघोपुर, बनिया वैसी और गोपालपुर के ब्रह्मपुर क्षेत्र में प्रमुख बांधों के टूटने से आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया था। तेज बहाव के कारण कई कच्चे घर ढह गए। प्रभावित परिवारों के सामने अब रहने की जगह, भोजन और जरूरी सामान की समस्या बनी हुई है। प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मत के लिए सैंड बैग लगाए जा रहे हैं। साथ ही पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि दोबारा कटाव या बाढ़ का खतरा पैदा होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
सड़क और रेल संपर्क पर भी पड़ा असर
बाढ़ के तेज बहाव ने परिवहन व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। पुरानी रेलवे लाइन का एक बड़ा हिस्सा नदी में समा गया है। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग-80 पर कई दिनों से वाहनों का परिचालन बाधित है। इससे प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है। कई ग्रामीण संपर्क सड़कें भी टूट गई हैं। इससे गांवों से मुख्य सड़कों और बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। पानी घटने के बाद इन सड़कों की मरम्मत प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।
हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद
बाढ़ ने किसानों को भी बड़ा आर्थिक झटका दिया है। दियारा और मैदानी क्षेत्रों में लगी धान, मक्का और केले की हजारों हेक्टेयर फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई। फसल खराब होने से किसानों की आय प्रभावित हुई है और उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। बाढ़ के पानी के साथ पशुओं का चारा भी बह गया है। इससे पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।
पीने के पानी का संकट बढ़ा
बाढ़ प्रभावित गांवों में दूषित पानी अब बड़ी चिंता बन गया है। कई चापाकल और कुएं बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। इससे लोगों के सामने साफ और सुरक्षित पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है। गंगा और कोसी का जलस्तर करीब डेढ़ से दो फीट नीचे आया है, लेकिन नवगछिया अनुमंडल की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। 90 से अधिक पंचायतों के 370 से ज्यादा गांवों में अब भी जलजमाव बना हुआ है।
सामुदायिक रसोई से मिल रही राहत
बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन केंद्रों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को रोजाना भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन का फोकस फिलहाल राहत सामग्री, भोजन, पेयजल और जरूरी सेवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने पर है।
पानी घटने के बाद बीमारी का खतरा
बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जगह-जगह जमा गंदा पानी और दूषित जलस्रोत स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में प्रशासन ने मेडिकल टीमों को अलर्ट किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार रखा गया है। आने वाले दिनों में जलजमाव हटाना, पेयजल स्रोतों को सुरक्षित करना और साफ-सफाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा।
अब राहत के बाद पुनर्वास की चुनौती
बाढ़ का पानी घटने से तत्काल खतरा भले कम हुआ हो, लेकिन प्रभावित परिवारों की परेशानियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। अब प्रशासन को राहत अभियान के साथ-साथ मकानों, सड़कों, बांधों और कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान का आकलन कर पुनर्वास की दिशा में काम करना होगा। नवगछिया में सामान्य जनजीवन की बहाली आने वाले दिनों में प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।



