Gumla:ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर केंद्रीय पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति ने मंगलवार को गुमला बंद का आह्वान किया है। इस बंद में गुमला के अलावा खूंटी, रांची, लोहरदगा और लातेहार जिले भी शामिल हैं। बंद से एक दिन पहले सोमवार की शाम गुमला शहर में समिति की ओर से मशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस के माध्यम से लोगों और व्यवसायियों से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की गई।
मशाल जुलूस में जमकर हुई नारेबाजी
सोमवार शाम निकाला गया मशाल जुलूस शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। इस दौरान आंदोलन से जुड़े लोगों ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर नारेबाजी की और लोगों का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया। जुलूस में शामिल बंद समर्थकों ने दुकानदारों और अन्य व्यवसायियों से मंगलवार को अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की। समिति का कहना है कि बंद का उद्देश्य ओबीसी समुदाय की मांगों को मजबूती से सामने रखना है।
पांच जिलों में बंद का आह्वान
केंद्रीय पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति के आह्वान का असर गुमला के साथ आसपास के कई जिलों में भी देखने को मिल सकता है। आंदोलन में शामिल जिलों में:
- गुमला
- खूंटी
- रांची
- लोहरदगा
- लातेहार
शामिल हैं। बंद के दौरान बाजार और व्यावसायिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना है।
OBC आरक्षण बढ़ाने की मांग
समिति का कहना है कि ओबीसी समुदाय को आरक्षण का उचित लाभ दिलाने के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाना जरूरी है। इसी मांग को लेकर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जा रहा है। समिति के सदस्यों ने लोगों से बंद को सफल बनाने और अपनी मांग के समर्थन में आगे आने की अपील की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि ओबीसी समुदाय के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और उनकी मांगों पर उचित निर्णय लेना चाहिए।
बंद को लेकर प्रशासन अलर्ट
प्रस्तावित बंद को देखते हुए जिला प्रशासन भी सतर्क है। बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। खासकर प्रमुख बाजारों, संवेदनशील स्थानों और शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर नजर रखे जाने की संभावना है। प्रशासन की कोशिश रहेगी कि बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
आंदोलन पर बनी रहेगी नजर
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर बुलाए गए इस बंद से गुमला समेत पांच जिलों में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब मंगलवार को बंद का बाजार और सामान्य जनजीवन पर कितना असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।




