New Delhi : स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसका अत्यधिक और गलत तरीके से उपयोग सेहत के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से कमर दर्द, गर्दन व कंधों में जकड़न, स्पॉन्डिलाइटिस और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस स्थिति को आमतौर पर “टेक नेक” या “स्मार्टफोन सिंड्रोम” कहा जाता है।
जब लोग लंबे समय तक मोबाइल को झुककर देखते हैं, तो रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द और हड्डियों की कमजोरी तक की समस्या हो सकती है। स्पॉन्डिलाइटिस में रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में सूजन आ जाती है, और मोबाइल का गलत मुद्रा में लगातार इस्तेमाल इस खतरे को और बढ़ा देता है। खासतौर पर युवा और किशोर वर्ग में यह समस्या तेजी से देखी जा रही है।
मोबाइल पर लंबे समय तक गेम खेलना, वीडियो देखना या सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना आम हो गया है। इस दौरान लोग सही बैठने की मुद्रा का ध्यान नहीं रखते, जिससे पीठ और कमर पर लगातार दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे यही स्थिति गंभीर गर्दन और कमर दर्द में बदल जाती है।
मोबाइल का असर सिर्फ हड्डियों और मांसपेशियों तक सीमित नहीं है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) आंखों की रेटिना पर असर डाल सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखना, सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया पर तुलना और ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा तनाव, चिंता और नींद की कमी का कारण बन सकती है। नींद पूरी न होने से शरीर की ऊर्जा और मांसपेशियों की रिकवरी प्रभावित होती है, जिससे मानसिक थकान बढ़ती है।
बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोबाइल का उपयोग सीमित समय के लिए करें और स्क्रीन को आंखों की ऊंचाई पर रखें। लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक, हल्की स्ट्रेचिंग, और सही मुद्रा (पीठ सीधी, कंधे ढीले) अपनाना जरूरी है। आंखों की सुरक्षा के लिए ब्लू लाइट फिल्टर या स्क्रीन फिल्टर का उपयोग फायदेमंद हो सकता है।






