New Delhi : भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। अब अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत भी अंतरिक्ष में दुश्मन देशों के सैटेलाइट्स और मिसाइलों पर नजर रखने की तकनीक हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। अहमदाबाद स्थित निजी कंपनी अजिस्टा स्पेस ने पहली बार अंतरिक्ष से किसी दूसरे स्पेसक्राफ्ट को ट्रैक कर उसकी तस्वीरें लेने में सफलता हासिल की है।
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की ली तस्वीर
अजिस्टा स्पेस के AFR (80 किलोग्राम) सैटेलाइट ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की स्पष्ट तस्वीरें कैप्चर की हैं। यह प्रयोग 3 फरवरी को किया गया, जब AFR ने पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर ऑर्बिट में घूम रहे ISS को ट्रैक किया।
दो अलग-अलग प्रयासों में ISS की 15 हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ली गईं, जो लगभग 250–300 किलोमीटर की दूरी से और सूर्य की विपरीत दिशा में ली गई थीं।
कंपनी के अनुसार, AFR ने 2.2 मीटर सैंपलिंग की सटीक इमेजिंग की, जो इसकी ट्रैकिंग एल्गोरिदम और कैमरा सटीकता को प्रमाणित करती है। दोनों प्रयास 100 प्रतिशत सफल रहे।
पहली बार भारत की निजी कंपनी ने किया कारनामा
यह पहली बार है जब भारत की किसी निजी कंपनी ने अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे स्पेसक्राफ्ट को ट्रैक कर उसकी तस्वीर ली है। इस तकनीक को इन-ऑर्बिट स्नूपिंग या स्पेस वॉच कहा जाता है। इससे पहले यह क्षमता केवल अमेरिका, रूस और चीन जैसे महाशक्तियों के पास ही थी।
AFR सैटेलाइट को SpaceX के Falcon-9 रॉकेट से 13 जून 2023 को लॉन्च किया गया था। अजिस्टा का दावा है कि फिलहाल भारत में AFR ही ऐसा सैटेलाइट है, जो इस स्तर की इन-ऑर्बिट निगरानी कर सकता है।
भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा में बड़ा कदम
भारत के पास वर्तमान में 50 से अधिक ऑपरेशनल सैटेलाइट्स हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है। ये सैटेलाइट्स संचार, नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन और निगरानी में उपयोग होते हैं।
भू-राजनीतिक तनाव के दौर में इनकी सुरक्षा बेहद अहम है। स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA) के तहत अगर कोई दुश्मन सैटेलाइट या मिसाइल भारत के स्पेस एसेट्स के करीब आती है, तो इस तकनीक से समय रहते चेतावनी मिल सकेगी।
अजिस्टा स्पेस और उसकी ताकत
अजिस्टा स्पेस का मुख्यालय अहमदाबाद (गुजरात) में है और इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सनंद में स्थित है, जिसे एशिया की पहली निजी सैटेलाइट फैक्ट्री माना जाता है। कंपनी हर साल 50 सैटेलाइट बनाने की क्षमता रखती है।
इसके इंजीनियर इसरो के 12 से अधिक मिशनों में काम कर चुके हैं। कंपनी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड, इमेज प्रोसेसिंग और सैटेलाइट बस इंजीनियरिंग में मजबूत मानी जाती है।
इन-ऑर्बिट स्नूपिंग क्या है?
इन-ऑर्बिट स्नूपिंग का मतलब है अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे सैटेलाइट्स या ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक करना और उनकी तस्वीरें लेना। AFR अपने उन्नत सेंसर और कंट्रोल सिस्टम से सैटेलाइट को सटीक दिशा में घुमाकर लक्ष्य की इमेज कैप्चर करता है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भारत की स्पेस डिफेंस और निजी स्पेस इंडस्ट्री को नई ऊंचाई देगी। भविष्य में ऐसे सैटेलाइट्स
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स्पेस डेब्री ट्रैकिंग,
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मिसाइल चेतावनी प्रणाली,
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और अंतरिक्ष अभियानों में सहयोग
जैसे अहम कार्यों में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

