Ranchi: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक और धांधली का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सीआईडी की जांच में इस संगठित गिरोह के नेटवर्क को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट के तार झारखंड से लेकर बिहार, दिल्ली और नेपाल की राजधानी काठमांडू तक जुड़े थे। गिरोह ने अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के लिए अलग-अलग पैकेज और रकम तय कर रखी थी। प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने से लेकर उत्तर याद कराने और परीक्षा केंद्रों पर नकल कराने तक के लिए अलग-अलग पैसे वसूले जाते थे। इस मामले में सीआईडी अब तक दो दर्जन से अधिक दलालों, एजेंटों और फर्जी अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है। अब सीआईडी अगले महीने अदालत में पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
छह शहरों में बनाए गए थे गिरोह के गुप्त ठिकाने
सीआईडी की जांच में सामने आया है कि प्रश्न पत्र लीक होने के बाद मुख्य सेटर मिथिलेश सिंह और उसके सहयोगियों ने अभ्यर्थियों तक इसे पहुंचाने के लिए व्यापक नेटवर्क तैयार किया था। गिरोह ने अलग-अलग शहरों में सुरक्षित ठिकाने बनाए थे। इन जगहों पर चयनित अभ्यर्थियों को बुलाकर प्रश्नों के उत्तर याद कराए जाते थे।
जांच के अनुसार, गिरोह के प्रमुख ठिकानों में ये स्थान शामिल थे:
- बोकारो: दुग्धा इलाके में गुप्त ठिकाना।
- आसनसोल: नियामतपुर का मैरिज हॉल और होटल।
- पटना: अभ्यर्थियों को तैयारी कराने के लिए इस्तेमाल किया गया ठिकाना।
- हजारीबाग: गिरोह के नेटवर्क का एक प्रमुख केंद्र।
- धनबाद: अभ्यर्थियों को उत्तर याद कराने की व्यवस्था।
इसके अलावा मुजफ्फरपुर, दिल्ली और नेपाल की राजधानी काठमांडू तक अभ्यर्थियों को ले जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पेपर लीक का यह नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि दूसरे राज्यों और देश की सीमा के बाहर तक फैला हुआ था।
पेपर छपाई से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में गड़बड़ी
जांच में प्रश्न पत्रों की छपाई और परीक्षा केंद्रों तक उनकी सुरक्षित आपूर्ति की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। जानकारी के मुताबिक, जेएसएससी ने परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबेल एजेंसी को सौंपी थी। आरोप है कि वेबेल ने आयोग की अनुमति के बिना प्रश्न पत्रों की छपाई और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का काम आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया था। सीआईडी की जांच में इसी प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्न पत्र लीक होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि लीक हुआ प्रश्न पत्र मुख्य सेटर मिथिलेश सिंह तक पहुंचा। इसके बाद उसने अपने सहयोगियों के जरिए अभ्यर्थियों तक प्रश्न और उत्तर पहुंचाने का नेटवर्क तैयार किया। हालांकि, इस मामले में संबंधित लोगों की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
लाखों रुपये लेकर पास कराने का था खेल
सीआईडी की जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह ने परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली थी। इसके लिए अलग-अलग तरीके और उनके हिसाब से कीमत तय की गई थी।
गिरोह की कार्यप्रणाली में मुख्य रूप से तीन तरीके शामिल थे:
- प्रश्न पत्र उपलब्ध कराना: परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को लीक प्रश्न पत्र देना।
- उत्तर याद कराना: सुरक्षित ठिकानों पर अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटवाना।
- परीक्षा केंद्र पर नकल: परीक्षा के दौरान अनुचित तरीके से मदद पहुंचाने की व्यवस्था करना।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन तरीकों के लिए अलग-अलग रकम ली जाती थी। इस पूरे फर्जीवाड़े का उद्देश्य पैसे के बदले अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराना था।
अगले महीने दाखिल होगी पूरक चार्जशीट
जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले की जांच अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। सीआईडी अगले महीने अदालत में पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। इस चार्जशीट में परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों, प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों, गिरोह के दलालों और कथित तौर पर अवैध तरीके से नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों की भूमिका का विवरण शामिल किए जाने की तैयारी है। जांच एजेंसी इन सभी के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य भी अदालत में पेश करेगी। पूरक चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। JSSC CGL पेपर लीक मामला झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब अभ्यर्थियों की नजर सीआईडी की अगली कार्रवाई और अदालत में दाखिल होने वाली पूरक चार्जशीट पर टिकी है।
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