New Delhi : यदि आपके सेविंग अकाउंट में अक्सर अच्छी-खासी रकम जमा रहती है, तो एक खास बैंकिंग सुविधा आपकी बचत पर मिलने वाले ब्याज को काफी बढ़ा सकती है। इस सुविधा का नाम ऑटो स्वीप (Auto Sweep) है। इसे सक्रिय कराने पर तय सीमा से अधिक जमा राशि स्वतः फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में बदल जाती है, जिससे उस अतिरिक्त राशि पर सेविंग अकाउंट की बजाय एफडी के अनुसार ब्याज मिलता है।
क्या है ऑटो स्वीप सुविधा?
ऑटो स्वीप एक बैंकिंग सुविधा है, जिसमें ग्राहक के सेविंग या करंट अकाउंट के लिए एक स्वीप लिमिट तय की जाती है। जैसे ही खाते में जमा राशि इस सीमा से अधिक हो जाती है, अतिरिक्त रकम अपने आप एफडी में ट्रांसफर हो जाती है। जरूरत पड़ने पर यह राशि वापस खाते में भी उपलब्ध हो सकती है, हालांकि इसकी प्रक्रिया और शर्तें अलग-अलग बैंकों में भिन्न हो सकती हैं।
कैसे मिलता है फायदा?
मान लीजिए आपने अपने सेविंग अकाउंट में 20,000 रुपये की ऑटो स्वीप लिमिट तय कराई है। यदि आपके खाते में 80,000 रुपये जमा हैं, तो 20,000 रुपये सेविंग अकाउंट में रहेंगे, जबकि शेष 60,000 रुपये स्वतः एफडी में परिवर्तित हो जाएंगे। इस अतिरिक्त राशि पर आपको बैंक की एफडी दर के अनुसार ब्याज मिलेगा।
कितना बढ़ सकता है ब्याज?
अधिकांश बैंकों में सामान्य सेविंग अकाउंट पर ब्याज दर लगभग 2.5% से 3% के आसपास होती है, जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर यह दर अक्सर 6.5% से 7% या उससे अधिक हो सकती है। ऐसे में ऑटो स्वीप सुविधा के जरिए अतिरिक्त राशि पर सेविंग अकाउंट की तुलना में काफी अधिक ब्याज मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, “तीन गुना ब्याज” हर बैंक और हर समय लागू नहीं होता, क्योंकि ब्याज दरें बैंक और एफडी अवधि के अनुसार अलग-अलग होती हैं।
ऑटो स्वीप के प्रमुख फायदे
- अतिरिक्त जमा राशि पर एफडी के अनुसार अधिक ब्याज मिलने की संभावना।
- पैसे को मैन्युअली एफडी में ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं।
- जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि तक पहुंच आसान हो सकती है (बैंक की शर्तों के अनुसार)।
- बचत और धन प्रबंधन बेहतर बनाने में मदद।
सुविधा शुरू कराने के लिए क्या करें?
यदि आपके बैंक में ऑटो स्वीप सुविधा उपलब्ध है, तो बैंक शाखा में जाकर या इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग (जहां उपलब्ध हो) के माध्यम से इसे सक्रिय कराया जा सकता है। बैंक आपके खाते के लिए स्वीप लिमिट और अन्य नियम निर्धारित करेगा।
ध्यान दें: ऑटो स्वीप की सुविधा, न्यूनतम राशि, एफडी अवधि, ब्याज दर और निकासी के नियम हर बैंक में अलग-अलग हो सकते हैं। सुविधा शुरू कराने से पहले अपने बैंक से इसकी शर्तों और लाभों की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें।



