झारखंड के सीएम स्कूल्स में खराब रिजल्ट पर प्राचार्यों को नोटिस

रांची: झारखंड में संचालित मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (CM Schools of Excellence) की 10वीं सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में निराशाजनक परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम 60 प्रतिशत से भी कम रहा है, उनके प्राचार्यों

झारखंड के सीएम स्कूल्स में खराब रिजल्ट पर प्राचार्यों को नोटिस
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रांची: झारखंड में संचालित मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (CM Schools of Excellence) की 10वीं सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में निराशाजनक परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम 60 प्रतिशत से भी कम रहा है, उनके प्राचार्यों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को कारण बताओ नोटिस (शो कॉज नोटिस) जारी किया गया है।

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झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन ने स्पष्ट कहा कि इन स्कूलों का प्रदर्शन अस्वीकार्य है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इन 19 स्कूलों में परिणाम सिर्फ 19.64% से 57% के बीच रहा है। यह मानक से काफी कम है, जबकि राज्य सरकार ने इन स्कूलों को विशेष संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक, स्मार्ट क्लास और अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान की थीं।

शशि रंजन ने यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित प्रधानाध्यापक एक सप्ताह के भीतर अपने जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के माध्यम से लिखित स्पष्टीकरण दें। उनसे यह पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली के तहत विभागीय और अनुशासनिक कार्रवाई की जाए।

राज्य सरकार द्वारा खोले गए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना था। इनमें आधुनिक शिक्षा सुविधाएं और संसाधन मुहैया कराए गए थे ताकि सरकारी स्कूलों का स्तर ऊंचा हो सके। लेकिन इस बार का परीक्षा परिणाम सरकार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया।

शिक्षा विभाग अब इन स्कूलों की प्रशासनिक कार्यशैली, शिक्षकों की जवाबदेही और छात्रों के प्रदर्शन की गहराई से समीक्षा करेगा। जिन स्कूलों ने विशेष संसाधन मिलने के बावजूद कमजोर प्रदर्शन किया है, उनके प्राचार्यों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक अगर प्राचार्य समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उनके खिलाफ सस्पेंशन या तबादले जैसी कार्रवाई भी संभव है। शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार लाना प्राथमिकता है और इसमें कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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