New Delhi : झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से गुजर रही रेलवे लाइन को डायवर्ट करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। इसका उद्देश्य बाघों और हाथियों के प्रमुख कॉरिडोर को सुरक्षित रखना है। लंबे समय से जारी विवाद के बाद तीसरी रेल लाइन बिछाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है और मौजूदा ट्रैक को कोर क्षेत्र से बाहर शिफ्ट करने की मंजूरी दी गई है।
भारतीय रेलवे की सोननगर से पतरातू तक तीसरी रेल लाइन परियोजना का काम कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है, लेकिन पलामू टाइगर रिजर्व का कोर एरिया इसमें सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। यह इलाका वन्यजीवों, खासकर बाघ और हाथियों की आवाजाही का अहम मार्ग है, जहां निर्माण कार्य उनके लिए खतरा बन सकता था।
इस मामले की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब रेलवे विकास निगम ने तीसरी लाइन के लिए एनओसी मांगी थी, लेकिन पीटीआर प्रशासन ने पर्यावरणीय कारणों से इसे अस्वीकार कर दिया। बाद में मामला राज्य वन्यजीव बोर्ड और फिर नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड के पास पहुंचा। 2023 में बोर्ड ने तीसरी लाइन के प्रस्ताव को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कोर एरिया में नया ट्रैक बनाना उचित नहीं है।
नई योजना के अनुसार, लातेहार जिले में छिपादोहर और हेहेगड़ा स्टेशनों के बीच करीब 11 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को डायवर्ट कर लगभग 14 किलोमीटर तक किया जाएगा। नया ट्रैक केड गांव के रास्ते से गुजरेगा और अधिकांश हिस्सा रिजर्व क्षेत्र के बाहर रहेगा। जहां ट्रैक का कुछ हिस्सा रिजर्व के भीतर आएगा, वहां वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए टनल का निर्माण किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए सर्वे कार्य पूरा हो चुका है और वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की टीम ने भी पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन किया है। फिलहाल जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
रेलवे लाइन के रीलोकेशन का प्रस्ताव पारित हो चुका है और डीपीआर तैयार है। अब वन विभाग की औपचारिक प्रक्रियाएं और भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

