Ranchi: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची में डॉक्टरों की प्रोन्नति का तरीका बदलने की तैयारी है। अब चिकित्सकों को पदोन्नति देने में केवल उनकी वरीयता या सेवा अवधि ही नहीं, बल्कि मरीजों के इलाज, सर्जरी, मेडिकल शिक्षा और शोध में उनके योगदान को भी महत्व दिया जाएगा। इसके लिए रिम्स नियमावली-2002 में बदलाव कर नई रिम्स विनियम-2026 व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना, डॉक्टरों की जवाबदेही बढ़ाना और मेडिकल शिक्षा व शोध को प्रोत्साहित करना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो प्रोन्नति के लिए चिकित्सकों के काम का मूल्यांकन निर्धारित अंकों के आधार पर किया जाएगा।
RIMS डॉक्टरों की प्रोन्नति के लिए 100 अंकों का होगा मूल्यांकन
प्रस्तावित रिम्स विनियम-2026 के तहत डॉक्टरों की पदोन्नति के लिए कुल 100 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें 85 अंक ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया यानी निर्धारित मानकों पर आधारित मूल्यांकन के होंगे, जबकि 15 अंक साक्षात्कार के लिए रखे गए हैं। प्रोन्नति के लिए डॉक्टरों को कुल 100 में से कम से कम 50 अंक हासिल करने होंगे। इस व्यवस्था में चिकित्सकों के अलग-अलग कार्यक्षेत्रों को महत्व दिया गया है। इससे डॉक्टरों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ मरीजों के इलाज और अस्पताल की गतिविधियों में उनके योगदान का भी आकलन किया जा सकेगा।
किस काम के लिए कितने अंक मिलेंगे?
प्रस्तावित नियमावली में प्रोन्नति के लिए अंकों का बंटवारा इस प्रकार किया गया है:
- टीचिंग एवं ट्रेनिंग: 30 अंक
- शोध कार्य: 20 अंक
- पेशेंट केयर सर्विस: 25 अंक
- कॉरपोरेट एक्टिविटी: 10 अंक
- साक्षात्कार: 15 अंक
इस तरह शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए सबसे अधिक 30 अंक निर्धारित किए गए हैं। वहीं, मरीजों की देखभाल और उपचार से जुड़े कार्यों के लिए 25 अंक मिलेंगे। शोध में योगदान के लिए 20 अंक रखे गए हैं। इस बदलाव से डॉक्टरों को पढ़ाने, नई चिकित्सा तकनीकों पर शोध करने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
AIIMS दिल्ली के आधार पर तय होंगे प्रोन्नति के मानक
जानकारों के मुताबिक, रिम्स में डॉक्टरों की प्रोन्नति की नई व्यवस्था अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के मानकों के आधार पर तैयार की जा रही है। अब तक प्रोन्नति की प्रक्रिया में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), जिसे पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के नाम से जाना जाता था, की गाइडलाइन का आधार लिया जाता था। वहीं, सीधी भर्ती और नई नियुक्तियों के लिए अलग मूल्यांकन व्यवस्था प्रस्तावित है। इसमें ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया के लिए 75 अंक और साक्षात्कार के लिए 25 अंक निर्धारित किए गए हैं। यानी नई नियुक्तियों में कुल 100 अंकों के आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा।
अधीक्षक को 25 लाख रुपये तक के वित्तीय अधिकार देने का प्रस्ताव
नई नियमावली में रिम्स अधीक्षक के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को भी बढ़ाने की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार, अधीक्षक को 25 लाख रुपये तक की खरीदारी से जुड़े अधिकार दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य अस्पताल की जरूरतों को पूरा करने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है। प्रस्तावित अधिकारों के तहत आपात स्थिति में आवश्यक उपकरण, दवाइयां, सर्जिकल सामग्री और मरीजों के उपचार से संबंधित अन्य वस्तुओं की खरीद की जा सकेगी। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो जरूरी चिकित्सा संसाधनों की खरीद के लिए निर्णय लेने में होने वाली देरी कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन अधिकारों का इस्तेमाल निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार करना होगा।
RIMS की वेबसाइट पर मिलेगी डॉक्टरों की उपस्थिति और जरूरी जानकारी
रिम्स की वेबसाइट के संचालन और प्रबंधन को लेकर भी नई व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य संस्थान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना और प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना है। प्रस्ताव के मुताबिक, वेबसाइट पर संस्थान के आदेश, सूचनाएं, निर्णय और कार्रवाई से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा मरीजों के रिकॉर्ड तथा जन्म-मृत्यु से संबंधित अभिलेखों की उपलब्धता की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। डॉक्टरों और कर्मचारियों की बायोमीट्रिक उपस्थिति से जुड़ी जानकारी भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को चिकित्सकों की उपलब्धता से संबंधित जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही रिम्स को सेंट्रल टेली-रेडियोलॉजी और टेली-आईसीयू के प्रमुख केंद्र यानी हब के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे दूरस्थ स्थानों पर चिकित्सा सेवाओं और विशेषज्ञों की सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पांच नई स्थायी समितियों के गठन की तैयारी
रिम्स विनियम-2026 के प्रस्ताव में संस्थान के कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए पांच नई स्थायी समितियों के गठन का भी प्रावधान किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- स्थायी सुरक्षा समिति
- स्थायी शिकायत निवारण समिति
- स्थायी शोध समिति
- स्थायी अस्पताल संचालन समिति
- स्थायी तकनीकी विशिष्टता समिति
इन समितियों के गठन का उद्देश्य सुरक्षा, शिकायतों के समाधान, शोध गतिविधियों, अस्पताल प्रबंधन और तकनीकी जरूरतों से जुड़े कार्यों की निगरानी को व्यवस्थित करना है। इसके अलावा, रिम्स में चार उपाधीक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। डीन के अधिकारों का विस्तार करने और उनकी जिम्मेदारियां निर्धारित करने की योजना है। इससे संस्थान के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों के संचालन में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होगी नई व्यवस्था
रिम्स नियमावली-2002 में संशोधन कर तैयार किए जा रहे विनियम-2026 का प्रस्ताव अब राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कैबिनेट की सहमति महत्वपूर्ण होगी। कुल मिलाकर, प्रस्तावित बदलाव रिम्स में डॉक्टरों की प्रोन्नति से लेकर अस्पताल के प्रशासन, वित्तीय अधिकारों, डिजिटल पारदर्शिता और चिकित्सा सेवाओं के संचालन तक कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। मरीजों की देखभाल को प्रोन्नति के मूल्यांकन में 25 अंक देना इस प्रस्ताव का महत्वपूर्ण पहलू है। हालांकि, अंतिम प्रावधान और उनके क्रियान्वयन की स्थिति कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।



