Ranchi : राजधानी से सटे पिठोरिया थाना क्षेत्र इन दिनों अवैध रेत कारोबार का अड्डा बन गया है। यहाँ प्रतिदिन दर्जनों बालू लदे हाइवा ट्रक बेधड़क गुजरते हैं, लेकिन प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी से लोगों में गहरा आक्रोश है। क्षेत्रवासियों का दावा है कि यह पूरा गोरखधंधा प्रशासनिक संरक्षण में चल रहा है।
इस काले कारोबार की हकीकत उजागर करने जब स्थानीय पत्रकार विजय गोप मौके पर पहुँचे, तो उन पर माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया। न केवल गाली-गलौज और मारपीट की गई, बल्कि धमकी दी गई—”थाना हमारे साथ है, तुम कुछ नहीं कर सकते।”
यह बयान न केवल अपराधियों के बढ़े हुए हौसले को दिखाता है, बल्कि यह भी साफ करता है कि माफिया और पुलिस की मिलीभगत से लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में है। पत्रकार विजय गोप पर यह हमला महज एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला है।
घटना के बाद बुढ़मू और कांके के पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश देखा गया। उन्होंने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे संपूर्ण मीडिया बिरादरी का अपमान बताया है। पत्रकार संघों ने ऐलान किया है कि वे इस मामले को लेकर झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) से मिलेंगे और उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे।
पत्रकार संगठनों ने यह भी मांग की है कि पिठोरिया थाना की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, उन्होंने सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
यह मामला सिर्फ अवैध रेत खनन का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद को हिलाने वाला है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तब समाज में अराजकता फैलना स्वाभाविक है। ऐसे में समय की मांग है कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कठोर रुख अपनाएं।



