New Delhi: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग को मामले का जल्द निपटारा करने की समयसीमा तय कर दी है। कोर्ट ने दोनों विरोधी गुटों को चार सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें और दस्तावेज दाखिल करने को कहा है। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर विवाद पर अंतिम फैसला करना होगा।
ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत TMC के मूल नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए, लेकिन कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने TMC के नाम और चिह्न को किया था फ्रीज
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने सितंबर में अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ के आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। जब तक विवाद पर अंतिम फैसला नहीं होता, दोनों पक्षों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
अब क्या होगा? समझें पूरा टाइमलाइन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद में आगे की प्रक्रिया इस तरह होगी:
- चार सप्ताह: दोनों गुट चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें, जवाब और संबंधित दस्तावेज दाखिल करेंगे।
- इसके बाद तीन महीने: चुनाव आयोग मामले की सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला करेगा।
- अंतिम फैसला: आयोग तय करेगा कि TMC का मूल नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न किस पक्ष को दिया जाएगा।
इस तरह दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद चुनाव आयोग के पास निर्णय के लिए तीन महीने की समयसीमा होगी।
उपचुनाव के बीच बढ़ा विवाद
TMC के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद दोनों गुटों की ओर से उम्मीदवार भी मैदान में उतारे गए थे। इसी वजह से चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के तहत दोनों पक्षों को अलग नाम और चिह्न के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के बजाय पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मूल विवाद को तय करने के लिए चुनाव आयोग को समयसीमा के साथ आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। अब दोनों गुटों की दलीलों और दस्तावेजों के आधार पर आयोग को अंतिम निर्णय लेना होगा।




