New Delhi: SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। इंडिया ब्लॉक के कई प्रमुख नेता मार्च निकालते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े, लेकिन अदालत पहुंचने से पहले ही प्रदर्शनकारियों को गेट पर रोक दिया गया। इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव समेत कई नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने लोकतंत्र, संविधान और मतदान के अधिकार का मुद्दा उठाया। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग का समर्थन किया। SIR को लेकर विपक्ष की यह लामबंदी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची की निष्पक्षता पर जारी राजनीतिक बहस को दर्शाती है।
Delhi: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, along with INDIA bloc MPs, arrives at the Supreme Court.
INDIA bloc MPs are staging a protest against the ECI, demanding the resignation of CEC Gyanesh Kumar. https://t.co/IpD8mWVUAw
— IANS (@ians_india) October 12, 2026
लोकतंत्र और संविधान के मुद्दे पर विपक्ष एकजुट
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि सभी नेता लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता इस मुद्दे को याद रखेगी और अब इसका जवाब देने का समय है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर नेताओं ने विरोध मार्च के जरिए अपना पक्ष सामने रखा।
सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया कि सरकार ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए माहौल मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लोग अपने मतदान के अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि लोग सवाल पूछना और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जारी रखेंगे।
जंतर-मंतर को लेकर भी उठाए सवाल
प्रदर्शन स्थलों की सूची से जंतर-मंतर को हटाए जाने के मुद्दे पर सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विरोध के लिए निर्धारित जगहों को कम करने से लोगों की आवाज नहीं दबाई जा सकती। उनके बयान के मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति जताने और अपनी मांग रखने का अधिकार महत्वपूर्ण है।
डी. राजा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का किया समर्थन
सीपीआई नेता डी. राजा ने भी विरोध प्रदर्शन के दौरान निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किस तरह किया है, इस पर गंभीर सवाल हैं। डी. राजा ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग का समर्थन किया। हालांकि, निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्ष की आपत्तियों और आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
ममता बनर्जी बोलीं- मानवता के लिए न्याय मांग रहे हैं
विरोध मार्च में शामिल पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि विपक्ष न्याय की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम मानवता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।” SIR विवाद के बीच विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी भी पात्र मतदाता का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कई विपक्षी नेता शामिल
SIR विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिट याचिका में कई विपक्षी नेताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। इनमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत राय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर के नाम हैं। याचिका में निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम में दो मुद्दे प्रमुख हैं—मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की आपत्तियां और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर उठाए जा रहे सवाल। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।


