New Delhi : सर्दियों में ठंड से बचने के लिए कंबल या रजाई में मुंह ढककर सोना कई लोगों की आम आदत है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। कंबल से नाक और मुंह ढककर सोने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है, जिससे सांस लेने में परेशानी, थकावट, मानसिक तनाव और कई बार जानलेवा स्थिति भी पैदा हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति पूरी रात चेहरे को कंबल से ढककर सोता है, तो वह बार-बार वही हवा अंदर लेता है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है। इससे शरीर और दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसका असर सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और कन्फ्यूजन के रूप में सामने आ सकता है।
अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी रहने से अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया जैसी याददाश्त से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों के लिए यह आदत और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। चेहरा ढककर सोने से उनकी सांस बार-बार रुक सकती है, जिससे घबराहट के साथ नींद टूट जाती है।
ऑक्सीजन की कमी दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है। हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों में इससे हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, तकिये या कंबल के अंदर सांस लेने से दम घुटने जैसी स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ठंड से बचने के लिए कंबल सिर तक ओढ़ा जा सकता है, लेकिन नाक और मुंह को हमेशा खुला रखना चाहिए ताकि ताजी हवा का प्रवाह बना रहे। अधिक ठंड लगने पर सुरक्षित तरीके से हीटर का उपयोग, गर्म कपड़े पहनना या कमरे का तापमान संतुलित रखना बेहतर विकल्प है।
सर्दियों की यह छोटी-सी आदत अनजाने में बड़े स्वास्थ्य नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए समय रहते इसे बदलना बेहद जरूरी है।






