Ranchi: कांके के सुकुरहुटू गांव की तंग गलियों में जब झूलन की झंकार गूंजने लगी और भक्तिरस से सराबोर झांकियां निकलने लगीं, तब सुकुरहुटू एक बार फिर मंडा पूजा की पवित्रता और उल्लास का प्रतीक बन गया। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि लोक-संस्कृति और परंपराओं का जीवंत चित्र भी प्रस्तुत करता नजर आया।
महिलाओं की कलश यात्रा
रंग-बिरंगी साड़ियों और पीले दुपट्टों में सजी महिलाएं किसी चलते-फिरते मंदिर सी प्रतीत हो रही थीं। सिर पर कलश और हाथों में श्रद्धा की चमक—इनका यह दृश्य अद्वितीय भक्ति का प्रतीक बन गया।
लोकगीतों की गूंज और पारंपरिक छवि
पुरुषों और युवाओं ने पारंपरिक वस्त्रों में लोक गीतों और धार्मिक प्रस्तुतियों से समूचे गांव को भक्ति में डुबो दिया। मुख्य मंच से वक्ता ने मंडा पूजा के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
भजन-कीर्तन से गूंजा सुकुरहुटू
पूजा के समापन के साथ ही भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। सेवा दल, पुजारियों और महिला मंडली की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को भव्यता प्रदान की।
मौजूद रहे प्रमुख ग्रामीण
इस आयोजन में हरिनाथ साहू, समनूर मंसूरी, रंजय कुमार, गौरीशंकर, अजय महतो, नागेंद्र महतो, मनोज, अजीज अंसारी, चन्दन बैठा सहित कई अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे।

