Patna : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने साफ़ कर दिया कि मुकाबला न जाति का था और न गठबंधन का—यह विश्वास की लड़ाई थी। मतदाताओं ने एक बार फिर मोदी–नीतीश की जोड़ी पर भरोसा जताते हुए NDA को भारी बहुमत दिया है। अमित शाह की 160 सीटों की भविष्यवाणी से भी बड़ी जीत NDA की झोली में गई।
यादव–मुस्लिम समीकरण नहीं आया तेजस्वी के साथ
चौंकाने वाली बात यह रही कि तेजस्वी यादव को न यादव समाज का पूरा समर्थन मिला, न मुस्लिम वोट एकतरफा उनके पक्ष में गए।
मतदाताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहा—क्या बिहार फिर जंगलराज की ओर लौटेगा?
तेजस्वी पर ‘लालू राज’ की छाया लगातार भारी पड़ी। ऊपर से उनका हर घर सरकारी नौकरी वाला वादा, जिसकी लागत बिहार के सालाना बजट से कई गुना अधिक बैठती है, मतदाताओं ने इसे अव्यावहारिक और खोखला माना।
कांग्रेस फिर साबित हुई कमजोर कड़ी
बहुत सी सीटों पर कांग्रेस मुकाबले में उतरे बिना ही बाहर हो गई।
महागठबंधन की डूबती नैया कांग्रेस की कमजोरी के कारण और बिखर गई।
NDA क्यों जीता? एक लाइन का जवाब—‘काम दिखा है’
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्र के अनुसार बिहारियों ने इस बार भावनाओं पर नहीं, लाभ पर वोट दिया।
केंद्र सरकार की योजनाओं का असर हर घर तक पहुँचा है—
- मुफ्त राशन
- विधवा पेंशन
- पीएम आवास योजना
- नई ट्रेनें
- हाईवे
- नए मॉल
- तथा महिलाओं को महिला रोजगार योजना के तहत सीधे 10,000 रुपये
बिहार में सवा डेढ़ करोड़ महिला मतदाता हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं ने NDA को बड़े पैमाने पर वोट दिया और पूरा परिवार उसी दिशा में गया। यही वोटों की सुनामी बनी।
जाति का गणित ध्वस्त, बिहार ने दिया एकतरफा जनादेश
इस चुनाव में दलित, पिछड़ा, ओबीसी, अति-पिछड़ा और सवर्ण—किसी भी समुदाय ने जातीय ध्रुवीकरण नहीं किया।
सबने चेहरा और काम को प्राथमिकता दी।
राजनीति में यह ऐतिहासिक बदलाव है।
सुशासन का ‘नीतीश मॉडल’ बना मास्टरस्ट्रोक
नीतीश कुमार की शराबबंदी, मोहल्लों में गुंडागर्दी पर नियंत्रण और सुरक्षित माहौल का असर वोटों में साफ दिखा।
अब महिलाएँ और लड़कियाँ रात में भी पटना की सड़कों पर निश्चिंत होकर घूम सकती हैं—यह सुशासन का नया अनुभव-आधारित आधार है।
महिलाओं, गरीबों और युवाओं पर मोदी का प्रभाव कायम
यह जीत सिर्फ सीटों की नहीं, मनोवैज्ञानिक बढ़त की भी है।
उत्तर भारत के गरीब और मध्यम वर्ग में नरेंद्र मोदी का प्रभाव अभी भी अटूट है।
जनादेश का संदेश साफ—काम करने वाले आगे, सपने बेचने वाले बाहर
2025 का जनादेश बताता है कि बिहार अब पुरानी राजनीति नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस-आधारित शासन चाहता है।
NDA को मिला यह जनसमर्थन स्पष्ट करता है कि बिहारियों ने काम के आधार पर दिल खोलकर मतदान किया है।






