कांके में सूख रहा उम्मीदों का नल: बदहाल जलस्रोत बना गर्मी में प्यासे लोगों की बड़ी चिंता

– 10 साल पहले बनी थी योजना, अब मरम्मत को तरस रहा जनता का हक मुकेश रंजन Ranchi: तपती गर्मी और जलसंकट के इस दौर में कांके प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में स्थित सार्वजनिक जलस्रोत खुद प्यासा हो गया है। कभी राहगीरों, कार्यालय आने-जाने

कांके में सूख रहा उम्मीदों का नल: बदहाल जलस्रोत बना गर्मी में प्यासे लोगों की बड़ी चिंता
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– 10 साल पहले बनी थी योजना, अब मरम्मत को तरस रहा जनता का हक

मुकेश रंजन 

Ranchi: तपती गर्मी और जलसंकट के इस दौर में कांके प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में स्थित सार्वजनिक जलस्रोत खुद प्यासा हो गया है। कभी राहगीरों, कार्यालय आने-जाने वाले कर्मियों और ग्रामीणों के लिए राहत का जरिया रहा यह नल आज बदहाली और उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जलस्रोत की चारदीवारी जगह-जगह से उखड़ चुकी है, ईंटें बिखरी पड़ी हैं और चारों ओर गंदगी का अंबार है। जलप्रवाह पूरी तरह ठप है और नल कई महीनों से सूखा पड़ा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सार्वजनिक जलस्रोत की मरम्मत को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि कांके के 32 पंचायतों से रोजाना आने वाले सैकड़ों लोग इस तपती गर्मी में एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं।

10 साल पुरानी योजना, पहचान तक नहीं बची –

सूत्रों की मानें तो यह जलस्रोत करीब एक दशक पहले किसी सरकारी योजना के तहत बनाया गया था। लेकिन आज इसका कोई शिलापट तक मौजूद नहीं है, जिससे न तो योजना का नाम पता चलता है और न ही निर्माण तिथि की जानकारी। चर्चा यह भी है कि टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद संबंधित कर्मियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने इस सुविधा को समय से पहले दम तोड़ने पर मजबूर कर दिया।

प्रशासन से राहत की उम्मीद –

स्थानीय नागरिकों, कर्मचारी संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जलस्रोत की तत्काल मरम्मत की जाए, उसकी नियमित सफाई सुनिश्चित हो और ऐसी सार्वजनिक सुविधाओं की निगरानी के लिए एक स्थायी व्यवस्था बने।

गर्मी के इस प्रचंड मौसम में जब जल की एक-एक बूंद कीमती हो गई है, कांके प्रखंड परिसर का यह नल प्रशासन की उदासीनता और व्यवस्था की खामियों की एक जिंदा तस्वीर बन गया है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन समय रहते जागता है या यह उम्मीदों का नल यूं ही सूखा रह जाएगा।

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