रजरप्पा/रामगढ़: झारखंड के रजरप्पा क्षेत्र अंतर्गत लारी गांव में मां सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हंगामे ने पूरे इलाके की शांति भंग कर दी। चंद लोगों की जिद और उपद्रव की वजह से हालात इतने बिगड़े कि गांव छावनी में तब्दील हो गया। घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा रहा, कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
जानकारी के अनुसार, विसर्जन के दौरान तालाब तक पहुंची प्रतिमा को कुछ लोग वापस विशेष संप्रदाय के इलाके में ले जाने पर अड़ गए। पुलिस ने जब इसका विरोध किया तो उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और मामला हिंसक झड़प में बदल गया। इस घटना में पुलिसकर्मियों के साथ-साथ कुछ ग्रामीणों के घायल होने की भी सूचना है।
घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि कुछ अन्य की तलाश जारी है। सोमवार रात हुई घटना के बाद मंगलवार को गांव में पूरी तरह सन्नाटा छाया रहा। मीडिया से बात करने के लिए कोई भी आगे नहीं आया, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्वों की वजह से पूरे गांव को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष लोगों को न फंसाया जाए।
पत्थरबाजी करने वालों पर हो सख्त कार्रवाई: छोटू वर्मा
इस मामले को लेकर मंगलवार को सुकरीगढ़ा लारी के ग्रामीण विश्व हिंदू परिषद के रामगढ़ जिला मंत्री छोटू वर्मा से मिले और पूरी घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों ने आवेदन के माध्यम से बताया कि मूर्ति विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा था, लेकिन प्रशासन की ओर से इसे जल्द खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार, विसर्जन में दूसरे गांव के कुछ लोग भी शामिल थे। इसी दौरान पुलिस प्रशासन और बाहरी लोगों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी।
विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री छोटू वर्मा ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पत्थरबाजी करने वाले वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि निर्दोष ग्रामीणों को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए। प्रशासन से अपील की गई है कि पूरे मामले की गहन जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और सामाजिक सौहार्द बना रहे।

