Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के नज़दीक स्थित नगड़ी गांव एक बार फिर आदिवासी जनआंदोलन का केंद्र बन गया है। रविवार को ग्राम प्रधान बीमा पाहन की अध्यक्षता में हुई ग्राम सभा में ग्रामीणों ने सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया। इस सभा का संचालन विकास टोप्पो ने किया।
सभा में आदिवासियों ने एक स्वर में कहा, “हमारी ज़मीन, हमारा हक है – किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा।” ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि नगड़ी की एक इंच भी कृषि योग्य भूमि सरकार को नहीं दी जाएगी। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की खुलेआम अवहेलना कर रही है, जिसमें स्पष्ट रूप से 70% ग्रामसभा की सहमति आवश्यक बताई गई है।
आदिवासी संगठनों का आरोप है कि सरकार ‘विकास’ के नाम पर आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और उनकी आजीविका पर प्रहार कर रही है। वक्ताओं ने कहा, “यह विकास नहीं, विस्थापन का षड्यंत्र है। सरकार की नीतियाँ सिर्फ ज़मीन नहीं, ज़मीर भी छीन रही हैं।”
आंदोलन का विस्तार:
नगड़ी ज़मीन बचाओ संघर्ष समिति ने 18 जून 2025 को रांची स्थित राजभवन के समक्ष राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन की घोषणा की है। इस प्रदर्शन में झारखंड के सभी प्रमुख आदिवासी संगठन भाग लेंगे और सरकार को चेतावनी देंगे कि आदिवासी अब चुप नहीं बैठेंगे।
सभा में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, आदिवासी जन परिषद, जय आदिवासी केंद्रीय परिषद, आदिवासी महासभा, युवा छात्र संघ, सरना प्रार्थना सभा तथा सीपीआई के पदाधिकारी भी मौजूद थे। सभी संगठनों ने मिलकर इस आंदोलन को जनजातीय एकता की मिसाल बताया।
संघर्ष का नारा है – ‘अब की बार ज़मीन नहीं जाएगी, ये संघर्ष आर-पार का होगा’।
नगड़ी अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के आदिवासी समुदाय की आवाज बन गया है – जहां संघर्ष सिर्फ ज़मीन का नहीं, अस्तित्व का है।

