जनजातीय समाज की अपनी पहचान और आस्था, इसे कोई तय नहीं कर सकता

गैल्डसन डुंगडुंग के बयान पर सोमा उरांव का पलटवार, कहा ,जनजातीय समाज अपनी धार्मिक परंपराओं के साथ खड़ा है’ Ranchi : गैल्डसन डुंगडुंग के हालिया बयान को लेकर जनजातीय समाज में बहस तेज हो गयी है। इसी क्रम में सोमा उरांव ने प्रतिक्रिया देते हुए

जनजातीय समाज की अपनी पहचान और आस्था, इसे कोई तय नहीं कर सकता
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  • गैल्डसन डुंगडुंग के बयान पर सोमा उरांव का पलटवार, कहा ,जनजातीय समाज अपनी धार्मिक परंपराओं के साथ खड़ा है’

Ranchi : गैल्डसन डुंगडुंग के हालिया बयान को लेकर जनजातीय समाज में बहस तेज हो गयी है। इसी क्रम में सोमा उरांव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनजातीय समाज की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को किसी एक व्यक्ति के बयान से परिभाषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनजाति कट्टर हिंदू है और रहेगी।

सोमा उरांव ने कहा कि जनजातीय समाज की अपनी समृद्ध परंपराएं, रीति-रिवाज, पूजा-पद्धतियां और सांस्कृतिक विरासत रही हैं। इन परंपराओं को समझे बिना जनजातीय समाज की धार्मिक पहचान को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के भीतर आस्था और धार्मिक पहचान को लेकर अलग-अलग विचार हो सकते हैं। इसलिए इस विषय पर संवाद तथ्यों, इतिहास और समुदाय की परंपराओं के आधार पर होना चाहिए।

सोमा उरांव ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं को राजनीतिक या वैचारिक विवाद का विषय बनाने के बजाय उनके संरक्षण और सम्मान पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने गैल्डसन डुंगडुंग के बयान पर अपनी असहमति जताते हुए कहा कि जनजातीय समाज अपनी पहचान और परंपराओं को लेकर स्वयं अपनी बात रखने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर समाज में स्वस्थ और तथ्यपरक संवाद की आवश्यकता है, ताकि जनजातीय पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

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