जयपुर पंचायत में एक ही नाली पर दो योजनाएं, डबल बिलिंग का खुलासा

Ranchi: झारखंड की राजधानी से सटे कांके प्रखंड के जयपुर पंचायत के कदमा गांव में विकास योजनाओं की आड़ में हुए वित्तीय गड़बड़ी का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सामने आए दस्तावेजों और तस्वीरों से यह स्पष्ट हुआ है कि एक ही पक्की नाली के

जयपुर पंचायत में एक ही नाली पर दो योजनाएं, डबल बिलिंग का खुलासा
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Ranchi: झारखंड की राजधानी से सटे कांके प्रखंड के जयपुर पंचायत के कदमा गांव में विकास योजनाओं की आड़ में हुए वित्तीय गड़बड़ी का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सामने आए दस्तावेजों और तस्वीरों से यह स्पष्ट हुआ है कि एक ही पक्की नाली के निर्माण पर दो अलग-अलग योजनाओं के तहत सरकारी राशि का भुगतान किया गया, जिससे डबल बिलिंग की गंभीर आशंका जताई जा रही है।

जयपुर पंचायत में एक ही नाली पर दो योजनाएं, डबल बिलिंग का खुलासा
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दो योजनाएं, एक ही नाली:

  • योजना 1 (कोड: 61136821) – कृष्णा मुंडा के घर से धर्मू महतो के खेत तक पक्की नाली निर्माण।
  • योजना 2 (कोड: 56331763) – जल मीनार से प्रमोद यादव के घर तक वही नाली।

दोनों योजनाओं की तारीखें समान (20 जनवरी से 11 मार्च 2022) हैं, कार्यस्थल एक जैसा है और स्थल की तस्वीरों में पेड़, दीवार की चिनाई, रंग और लोकेशन बिल्कुल एक जैसी हैं। इससे स्पष्ट है कि एक ही निर्माण कार्य को दो बार दर्शाकर फर्जी निकासी की गई।

डिजिटल दस्तावेज भी दे रहे हैं गवाही:
PFMS पोर्टल और ई-ग्रामस्वराज वाउचर के विश्लेषण से यह सामने आया कि दोनों योजनाओं के भुगतान अलग-अलग लाभुकों को दर्शाए गए हैं। जबकि स्थल और कार्य एक ही है। यह पंचायती व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता पर गहरा सवाल उठाता है।

ग्रामीणों ने उठाई आवाज:
इस गड़बड़ी को लेकर ग्रामीणों ने बीडीओ कांके को ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने इसे योजनाबद्ध धोखाधड़ी करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की डुप्लिकेट योजनाएं जनधन की लूट हैं और इससे उनका भरोसा टूट रहा है।

प्रशासन की अग्निपरीक्षा:
यह मामला केवल वित्तीय भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनविश्वास की परीक्षा है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पंचायत व्यवस्था के प्रति लोगों की आस्था को गहरा आघात पहुंचाएगा।

अब देखने वाली बात यह है कि क्या प्रशासन तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करेगा, या फिर कागज़ों में दबा दिया जाएगा यह घोटाला?

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