Ranchi: गांवों में होने वाले छोटे-मोटे विवाद अगर समय रहते बातचीत से सुलझ जाएं, तो न सिर्फ लोगों का समय और पैसा बच सकता है, बल्कि अदालतों पर मुकदमों का बोझ भी कम होगा। इसी उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से रांची में सामुदायिक मध्यस्थता को लेकर 60 दिवसीय मेगा जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत डालसा की टीम बुधवार को महुआजाड़ी पंचायत भवन और आसपास के गांवों में पहुंची और ग्रामीणों को विवादों का स्थानीय स्तर पर समाधान करने के तरीके बताए। यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ओर से चलाए जा रहे ‘सामुदायिक मध्यस्थता: एक मुकदमा-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर-2026’ कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विवादों को अदालत तक पहुंचने से पहले बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए लोगों को जागरूक करना है।
गांव में ही विवाद सुलझाने की पहल
डालसा की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि हर विवाद को अदालत तक ले जाना जरूरी नहीं है। कई मामलों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर आपसी सहमति से समाधान निकाला जा सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता इसी सोच को मजबूत करने का प्रयास है। पीएलवी कालिन्दर गोप ने ग्रामीणों को अभियान के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान से लोगों के बीच आपसी भाईचारा कायम रखने में मदद मिलेगी। साथ ही लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से होने वाली परेशानी से भी ग्रामीणों को राहत मिल सकती है। इस पहल में ग्राम पंचायतों और अन्य सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक कर विवादों को शुरुआती चरण में ही सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
घर-घर पहुंची डालसा की टीम
जागरूकता अभियान के दौरान डालसा की टीम ने कानीजाड़ी गांव में घर-घर जाकर ग्रामीणों से बातचीत की। टीम ने लोगों की समस्याएं सुनीं और उन्हें उपलब्ध कानूनी सहायता तथा समाधान के विकल्पों की जानकारी दी। अभियान के दौरान केवल विवादों के समाधान पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। मौके पर कई लोगों से योजनाओं से संबंधित आवेदन भी लिए गए। डालसा के अनुसार, अभियान के दौरान करीब 350 ग्रामीणों को जागरूक किया गया और विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने की दिशा में पहल की गई।
60 दिनों तक चलेगा जागरूकता अभियान
यह अभियान पहले चरण में 60 दिनों तक चलाया जाएगा। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों तक सामुदायिक मध्यस्थता और कानूनी सहायता की जानकारी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सह कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश पर चलाया जा रहा है। झालसा की सदस्य सचिव रंजना अस्थाना और रांची के न्यायायुक्त सह अध्यक्ष डालसा अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है। डालसा सचिव के नेतृत्व में गठित टीम अभियान के अलग-अलग चरणों में ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर लोगों को जागरूक करेगी। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाना है कि छोटी समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें हमेशा अदालत का दरवाजा खटखटाने की जरूरत नहीं है।
मुकदमे कम करने के साथ सामाजिक सौहार्द पर भी जोर
सामुदायिक मध्यस्थता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें विवाद के समाधान के साथ रिश्तों और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने पर भी जोर दिया जाता है। गांव के स्तर पर विवाद सुलझने से पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सकती है। डालसा का यह अभियान इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अगर ग्रामीण विवादों का समाधान शुरुआती स्तर पर ही बातचीत और मध्यस्थता से होने लगे, तो इससे न्याय व्यवस्था पर दबाव कम करने के साथ गांवों में आपसी विश्वास और भाईचारा मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।




