Ranchi : शनिवार की रात राजधानी रांची के बेड़ो थाना में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 250 ग्रामीणों की उग्र भीड़ ने थाना परिसर में घुसकर तोड़फोड़, नारेबाजी और धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
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इस बेकाबू स्थिति में थाना प्रभारी देवप्रताप प्रधान घायल हो गए, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
महादानी मैदान बना विवाद की जड़:
हंगामे की शुरुआत महादानी मैदान के पास अतिक्रमण हटाने को लेकर हुई।
बताया गया कि एक पक्ष ने बिना प्रशासनिक अनुमति के जेसीबी से अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तत्काल रोक दिया।
हालात बिगड़ते देख सीओ प्रताप मिंज मौके पर पहुंचे और 24 घंटे में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद भीड़ शांत होकर लौट गई, लेकिन तब तक थाना परिसर में आक्रोश अपना असर छोड़ चुका था।
घटना के मुख्य बिंदु:
- थाना परिसर में जबरन घुसकर की गई तोड़फोड़
- पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और अव्यवस्था
- थाना प्रभारी घायल, मेडिकल निगरानी में भेजे गए
- प्रशासन का 24 घंटे में कार्रवाई का वादा
- अतिरिक्त बल बुलाकर स्थिति पर पाया गया नियंत्रण
डीएसपी का बयान – बेबुनियाद है मारपीट का आरोप:
डीएसपी अशोक कुमार राम ने स्पष्ट किया कि,
पुलिस ने जेसीबी चालक के साथ कोई मारपीट नहीं की। यह आरोप निराधार है। घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है, और दोषियों की पहचान कर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। स्थिति की नजाकत को देखते हुए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों में असंतोष और अविश्वास की चिंगारी अब भी सुलग रही है।
व्यवस्था बनाम आक्रोश – प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
यह घटना सिर्फ एक अतिक्रमण नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की साख और क्षमता पर सीधी चोट है।
अब पूरा झारखंड देख रहा है कि क्या प्रशासन उग्र भीड़ और कानूनी मर्यादा के बीच संतुलन बना पाएगा?
झारखंड की पुलिस-प्रशासन के लिए यह सिर्फ एक रात नहीं, एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन चुकी है।



