Ranchi : राजधानी रांची का नागरमल मोदी सेवा सदन अस्पताल इन दिनों “सेवा” से ज्यादा “पानी” के लिए चर्चा में है। शनिवार की बारिश ने अस्पताल की ऐसी तस्वीरें सामने ला दीं, जो सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
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अस्पताल के अंदर हालात इतने बदतर हो गए कि वेटिंग हॉल जलमग्न हो गया, कई वार्डों में गंदा पानी भर गया और मरीजों को इलाज की जगह फिसलते फर्श और टपकती छतों से जूझना पड़ा। मरीजों के साथ आए परिजन बच्चों को गोद में उठाकर किसी सुरक्षित कोने की तलाश में भटकते रहे।
अस्पताल या बाढ़ राहत कैंप?
घुटनों तक भरे पानी में कतारों में खड़े लोग अब डॉक्टर से मिलने से पहले “कैसे पहुंचें?” यह सोच रहे हैं। गंदगी के बीच इलाज की उम्मीद में बैठे लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा—“यहाँ डॉक्टर से पहले नाविक की ज़रूरत है।”
प्रशासन का मौन — सबसे बड़ा शोर:
इस स्थिति पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई चेतावनी या सफाई नहीं दी गई, और ना ही नगर निगम की ओर से जल निकासी की कोई तत्काल व्यवस्था हुई। ये सवाल खड़े करता है कि क्या आपदा प्रबंधन सिर्फ कागज़ों में बैठक करने तक सीमित है?
जनता का आक्रोश:
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक बारिश का नतीजा नहीं, वर्षों की अनदेखी और लापरवाही का परिणाम है। अगर राजधानी के बीचोंबीच स्थित अस्पताल की यह स्थिति है, तो बाकी राज्य की स्थिति का अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं।
अब सवाल साफ है:
जब अस्पताल ही डूब रहा हो, तो मरीजों की उम्मीदें कैसे तैरेंगी?

