New Delhi : बदलती जीवनशैली और तली-भुनी, तीखी व पैकेज्ड चीज़ों की बढ़ती खपत ने आम लोगों के नमक (सोडियम) सेवन को जरूरत से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है। ब्रेड, आटा, इंस्टेंट फूड और स्नैक्स में छिपा सोडियम अक्सर हमारी जानकारी के बिना शरीर में पहुंच जाता है। नतीजतन, हम अनजाने में स्वास्थ्य जोखिमों को न्योता दे रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक वयस्क को प्रतिदिन अधिकतम 5 ग्राम नमक का सेवन करना चाहिए—जो लगभग एक छोटा चम्मच होता है। यह सीमा सिर्फ खाने में ऊपर से डाले गए नमक के लिए नहीं, बल्कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद छिपे सोडियम को जोड़कर तय की गई है।
इसके उलट, भारतीय खानपान में औसतन 10–12 ग्राम नमक रोज़ लिया जा रहा है, जो सुरक्षित सीमा से लगभग दोगुना है।
ज्यादा नमक से क्या नुकसान?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक अधिक नमक लेने से ये समस्याएं बढ़ती हैं—
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हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का जोखिम
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शरीर में सूजन और पानी रुकना
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किडनी पर अतिरिक्त बोझ
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हड्डियों का कमजोर होना
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यूरिक एसिड बढ़ना
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डिहाइड्रेशन
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चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां
कैसे रखें नमक पर नियंत्रण?
विशेषज्ञ कुछ आसान उपाय सुझाते हैं—
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पूरी तरह सफेद नमक की जगह सीमित मात्रा में सेंधा नमक मिलाकर उपयोग करें
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फल-सलाद पर नमक/चाट मसाला छिड़कने की आदत कम करें
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रात में नमकीन खाने से बचें—सुबह चेहरे पर सूजन आ सकती है
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दही/लस्सी में ज्यादा नमक न डालें; हल्का नमक और भुना जीरा बेहतर विकल्प है
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कफ की समस्या वालों के लिए दही और नमक का सेवन खास तौर पर सीमित रखें
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पैकेज्ड फूड लेते समय न्यूट्रिशन लेबल पर सोडियम जरूर देखें
निष्कर्ष
नमक शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन मात्रा ही दवा और ज़हर का फर्क तय करती है। WHO की 5 ग्राम वाली सलाह अपनाकर, हम ब्लड प्रेशर से लेकर किडनी तक कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं।

