New Delhi : वर्ष 2025 वैश्विक राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरा रहा। दुनिया के कई देशों में हुए चुनावों और राजनीतिक आंदोलनों ने सत्ता परिवर्तन की तस्वीर बदल दी। कहीं जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से नई सरकार चुनी, तो कहीं विरोध-प्रदर्शनों और हिंसा के बाद सत्तारूढ़ दलों को हटना पड़ा।
अफ्रीकी देश तंजानिया में 20 अक्टूबर को हुए आम चुनाव में सामिया सुलुह हसन दोबारा राष्ट्रपति बनीं, लेकिन चुनाव के बाद हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आईं। कैमरून में राष्ट्रपति पॉल बिया ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की।
उत्तरी अमेरिका में कनाडा के 28 अप्रैल को हुए चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी प्रधानमंत्री बने। ऑस्ट्रेलिया में 3 मई को हुए चुनाव में लेबर पार्टी ने जीत दर्ज की और एंथनी अल्बनीज दोबारा प्रधानमंत्री बने।
यूरोप में जर्मनी के फरवरी चुनाव में क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) ने जीत हासिल की, जबकि बेलारूस में राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने सातवीं बार सत्ता बरकरार रखी, हालांकि निष्पक्षता पर सवाल उठे।
एशिया में जापान में सत्तारूढ़ एलडीपी को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन हुआ। नेपाल में जनआंदोलन के बाद केपी ओली सरकार गिर गई और अंतरिम सरकार बनी।
लैटिन अमेरिका में अर्जेंटीना के मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति जाविएर मिलेई की पार्टी ने बड़ी सफलता हासिल की। अमेरिका में 2024 के चुनाव के बाद 2025 की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभाला।
2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि लोकतंत्र आज भी कई देशों में संघर्ष, विरोध और बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जनता की भूमिका सत्ता परिवर्तन में पहले से कहीं अधिक निर्णायक बनकर उभरी है।



