नई दिल्ली: 11 सितंबर 2001 की तारीख अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया के इतिहास में एक भयावह मोड़ के तौर पर दर्ज है। इसी दिन अमेरिका में हुए आतंकी हमलों ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया था। चार यात्री विमानों के अपहरण के बाद आतंकियों ने न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और वॉशिंगटन स्थित पेंटागन को निशाना बनाया। इस हमले में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और इसके बाद अमेरिका की सुरक्षा, खुफिया तथा विदेश नीति में व्यापक बदलाव देखने को मिला।
अब 9/11 हमले की 25वीं बरसी पर एक बार फिर उस घटना को याद किया जा रहा है। बीते ढाई दशकों में अमेरिका ने आतंकी खतरे से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया। एयरपोर्ट सुरक्षा से लेकर खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकी फंडिंग पर कार्रवाई तक कई बड़े कदम उठाए गए।
9/11 के बाद शुरू हुआ आतंकवाद के खिलाफ बड़ा अभियान
हमले के कुछ ही समय बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने आतंकवाद के खिलाफ व्यापक वैश्विक अभियान की घोषणा की। अमेरिका ने हमले के लिए जिम्मेदार अल-कायदा और उसके प्रमुख सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। 7 अक्टूबर 2001 को अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू हुआ। अमेरिका का उद्देश्य अल-कायदा के नेटवर्क को कमजोर करना और उसे समर्थन देने वाले तालिबान शासन पर दबाव बनाना था। इसके बाद आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी अभियान का दायरा और व्यापक होता गया। बाद के वर्षों में अमेरिका ने आतंकवादी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज की। संदिग्ध खातों और फंडिंग चैनलों की निगरानी बढ़ाई गई।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने संभाली बड़ी जिम्मेदारी
9/11 के बाद अमेरिका ने महसूस किया कि अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इसी सोच के तहत डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का गठन किया गया। 25 नवंबर 2002 को होमलैंड सिक्योरिटी एक्ट लागू हुआ और इसके तहत कई सरकारी एजेंसियों को एक बड़े संघीय विभाग के अंतर्गत लाया गया। इसका मकसद देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े प्रयासों में तालमेल बढ़ाना था। DHS ने आतंकवाद के अलावा सीमा सुरक्षा, आपातकालीन तैयारियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ा सूचना साझा करने पर जोर
9/11 से पहले अलग-अलग एजेंसियों के पास महत्वपूर्ण सूचनाएं मौजूद होने के बावजूद उनके बीच समन्वय की कमी को एक बड़ी कमजोरी माना गया। इसके बाद अमेरिका ने खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग को ज्यादा प्राथमिकता दी।
पेट्रियट एक्ट ने बदला जांच का तरीका
9/11 के बाद अमेरिकी संसद ने USA PATRIOT Act पारित किया। इस कानून ने आतंकवाद और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच के लिए सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों को कई अतिरिक्त अधिकार दिए। कानून के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, वित्तीय लेनदेन की जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत किया गया। हालांकि, समय के साथ इस कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर निजता और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल भी उठते रहे।
एयरपोर्ट सुरक्षा में आया बड़ा बदलाव
9/11 के बाद आम यात्रियों को सबसे बड़ा बदलाव हवाई यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में देखने को मिला। अमेरिका ने Transportation Security Administration यानी TSA का गठन किया। इसके बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों और सामान की जांच व्यवस्था को संघीय स्तर पर मजबूत किया गया। विमान के कॉकपिट को सुरक्षित बनाने के लिए दरवाजों की सुरक्षा बढ़ाई गई और एयर मार्शल व्यवस्था को भी मजबूत किया गया। आज एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच का जो व्यापक सिस्टम दिखाई देता है, उसकी बड़ी वजह 9/11 के बाद किए गए यही बदलाव हैं।
25 साल बाद भी 9/11 की याद क्यों महत्वपूर्ण?
9/11 को 25 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस हमले ने दुनिया की सुरक्षा सोच को जिस तरह बदला, उसका असर आज भी दिखाई देता है। आतंकवाद का खतरा भले ही अपना स्वरूप बदल चुका हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती अब भी कायम है। 9/11 की 25वीं बरसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह याद दिलाती है कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में केवल हथियार और सैन्य ताकत ही पर्याप्त नहीं हैं। समय पर मिलने वाली खुफिया जानकारी, एजेंसियों के बीच समन्वय, वित्तीय नेटवर्क पर निगरानी और तकनीक का सही इस्तेमाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ढाई दशक बाद 9/11 दुनिया के सामने एक ऐसी घटना के रूप में मौजूद है, जिसने अमेरिका की सुरक्षा नीति ही नहीं, बल्कि वैश्विक आतंकवाद-विरोधी रणनीति की दिशा भी बदल दी।


