मुकेश रंजन
Ranchi : सुकुरहुटू पंचायत एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। ग्राम प्रधान के चुनाव के लिए बुलाई गई ग्राम सभा उस समय स्थगित करनी पड़ी जब यह पाया गया कि निर्धारित एक-तिहाई कोरम भी पूरा नहीं हो सका। पंचायत के 9000 से अधिक मतदाताओं में से मात्र 334 लोग ही बैठक में शामिल हुए।
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झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 की धारा 8 (iii) के तहत, अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम प्रधान का चुनाव पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मान्यता प्राप्त व्यक्ति जैसे मांझी, मुण्डा, पाहन, महतो आदि की अध्यक्षता में होना आवश्यक है। लेकिन जब तक नियमानुसार एक-तिहाई उपस्थिति नहीं होती, तब तक चुनाव की प्रक्रिया वैध नहीं मानी जाती।
जिला प्रशासन की ओर से उपस्थित अधिकारियों ने पुष्टि की कि कोरम पूरा न होने के कारण चुनाव फिलहाल स्थगित किया गया है और अगली तिथि जिला के मार्गदर्शन अनुसार तय की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद केवल एक प्रधान पद शेष रहेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले, परंपरागत नेतृत्व बनाम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाने की चुनौती प्रशासन के सामने स्पष्ट रूप से दिख रही है।
स्थानीय समाजशास्त्रियों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना केवल चुनावी विफलता नहीं, बल्कि जन भागीदारी और ग्रामीण नेतृत्व की दिशा में पुनः सोचने का अवसर भी है।
अब देखना यह है कि अगली ग्राम सभा में क्या जनजागरूकता दिखेगी या फिर यह मुद्दा एक बार फिर प्रशासनिक निर्णयों में उलझ कर रह जाएगा।



