Ranchi : झारखंड के खेतों में इस बार सिर्फ फसलें ही नहीं, जागरूकता, तकनीक और आत्मनिर्भरता की भी फसल लहलहा रही है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) द्वारा चलाए जा रहे ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ ने महज 6 दिनों में 63 हजार से अधिक किसानों तक पहुंच बनाकर ग्रामीण कृषि में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
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यह अभियान 29 मई से शुरू हुआ है और 12 जून तक चलेगा। बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने बताया कि यह कार्यक्रम झारखंड के 16 जिलों के 646 गांवों में संचालित हो रहा है, जिसमें किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत तकनीकों, जैविक खेती, पशुपालन, मिट्टी परीक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है।
फसल और पशुधन दोनों पर जोर:
किसानों को धान, मक्का, श्री अन्न, अरहर, मूंगफली, तिल जैसी फसलों की वैज्ञानिक पद्धति से खेती सिखाई जा रही है। साथ ही पशुओं की गर्मी और बारिश के मौसम में देखभाल, बीमारियों की पहचान और रोकथाम, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन जैसे विषयों पर भी जागरूक किया जा रहा है।
सरकारी योजनाओं की सीधी जानकारी:
किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, झारखंड किसान समृद्धि योजना, बिरसा बीज योजना और कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे इनका सीधा लाभ ले सकें। वैज्ञानिक किसानों को इन योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मजबूत टीम, प्रभावशाली संगठन:
अभियान के तहत 16 जिलों में 36 टीमें बनाई गई हैं, जिनमें 109 वैज्ञानिक, 78 कृषि पदाधिकारी और बीएयू के कई प्रशिक्षित विशेषज्ञ शामिल हैं। प्रतिदिन हर टीम 3 गांवों में कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसकी निगरानी डॉ. रेखा सिन्हा और डॉ. बी.के. अग्रवाल कर रहे हैं।
तकनीकी खेती से आत्मनिर्भर किसान:
यह अभियान सिर्फ जानकारी का प्रसार नहीं, बल्कि किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बिरसा विश्वविद्यालय का यह प्रयास झारखंड को विकसित भारत की राह पर आगे ले जाने वाला साबित हो रहा है।



