Ranchi : झारखंड की सियासत और सामाजिक चेतना को झकझोर देने वाला बयान सामने आया है राष्ट्रीय आदिवासी मंच के अध्यक्ष सन्नी उरांव को उन्होंने एक प्रखर प्रेस वार्ता में तथाकथित केन्द्रीय सरना समिति और उसके अध्यक्ष फुलचंद तिर्की को ललकारते हुए कहा कि उल-जलूल बयानबाजी कर आदिवासी समाज को गुमराह करना बंद करें! अगर हिम्मत है, तो कोर्ट जाएं और न्यायिक लड़ाई लड़ें, न कि राजनीतिक चालों से समाज को भ्रमित करें।
सन्नी उरांव का यह बयान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर करता है:
- पाहन महासम्मेलन की गूंज से मिशनरियों और उनके स्थानीय दलालों की चूलें हिल चुकी हैं।
- आदिवासी समाज आज अपने मूल धर्म, परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता की ओर लौट रहा है।
- डीलिस्टिंग कानून लागू होकर रहेगा और इससे धर्मांतरण कर चुके अल्पसंख्यकों को आदिवासी आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा।
सन्नी उरांव ने कहा कि
- जो लोग ईसाई या मुस्लिम धर्म स्वीकार कर चुके हैं, वे अब अल्पसंख्यक हैं।
- उन्हें ‘आदिवासी’ के नाम पर सरकारी लाभ मिलना बंद होना चाहिए।
- विरोध सिर्फ मिशनरियों से नहीं, उनके दलालों से भी है, जो आदिवासी हित के नाम पर साजिशन राजनीति कर रहे हैं।
- झारखंड से लेकर देशभर तक आदिवासी समुदाय अब नए आत्मगौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में बढ़ रहा है।



