Ranchi : रांची जिला परिषद की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा मोड़ देखने को मिला, जब अध्यक्ष निर्मला भगत के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बहुमत न मिलने के कारण धराशायी हो गया। इस निर्णय के साथ ही निर्मला भगत ने अपनी कुर्सी सुरक्षित रखी और जिला परिषद अध्यक्ष पद पर बनी रहीं।
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अविश्वास प्रस्ताव को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं और राजनीतिक हलचलों के बीच सोमवार को उपायुक्त कार्यालय में बैठक आयोजित की गई, जहां प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया। विपक्ष द्वारा प्रस्ताव के समर्थन में केवल आठ सदस्य ही उपस्थित हो सके, जबकि पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या यानी बहुमत प्राप्त नहीं हो सका। तय प्रक्रिया के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव को पारित कराने के लिए कुल सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें विपक्ष विफल रहा।
निर्मला भगत की कुर्सी सुरक्षित रहते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। इस मौके पर जिला परिषद के सदस्य रबुल अंसारी और जगराम कुजूर ने उन्हें बधाई दी और कहा कि यह परिणाम सच्चाई और जनसेवा की जीत है। दोनों प्रतिनिधियों ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे जनहित की जगह व्यक्तिगत राजनीति कर रहे थे, जिसे जनता ने नकार दिया है।
सूत्रों का कहना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में रांची जिला परिषद की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। विपक्ष की विफलता ने अध्यक्ष के पक्ष में एक नई राजनीतिक मजबूती तैयार की है, जिससे आगामी फैसलों और योजनाओं में उनका प्रभाव और अधिक गहराएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि जनता और प्रतिनिधियों के बीच विश्वास की बहाली है। वहीं, विपक्ष के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है।
निर्मला भगत ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत है, बल्कि उन सभी सदस्यों की है जो विकास और स्थायित्व में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वे और भी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करेंगी।



