Bihar : पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में अंधविश्वास ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। गांव की उन्मादी भीड़ ने डायन बताकर एक ही परिवार के पांच सदस्यों की नृशंस हत्या कर दी। मृतकों में सीता देवी, बाबूलाल उरांव, कातो देवी, मनजीत उरांव और रानी देवी शामिल हैं।
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गांव में बीते दो वर्षों में कई असामयिक मौतें और रहस्यमयी बीमारियों ने लोगों में डर पैदा कर दिया था। इसी भय और अफवाह के बीच कातो देवी पर झाड़-फूंक और तांत्रिक गतिविधियों के आरोप लगे। दावा किया गया कि वह सिद्धि के लिए बच्चों की बलि देती है। रामदेव उरांव के बेटे की मृत्यु के बाद जब अफवाह फैली कि बाबूलाल का परिवार उसके छोटे बेटे को भी बलि चढ़ाना चाहता है, तो भीड़ ने उग्र रूप ले लिया।
बताया जा रहा है कि नकुल उरांव, दिलीप उरांव और कमल उरांव ने इस भीड़ को उकसाया और हमले की साजिश रची। घर पर हमला कर परिवार के सभी सदस्यों को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया।
इस दिल दहला देने वाले नरसंहार से बचा सिर्फ एक बच्चा — सोनू कुमार। किसी तरह वह जान बचाकर अपनी नानी के गांव पहुंचा और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उसी के साहस से यह मामला सामने आया।
घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
शवों का देर रात पोस्टमार्टम किया गया और सुबह सोरा नदी के तट पर, कप्तान पुल के पास अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि 12 वर्षीय सोनू कुमार ने दी। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
यह घटना समाज को आईना दिखाती है कि अंधविश्वास और अफवाहें किस हद तक जानलेवा हो सकती हैं। प्रशासन ने जांच तेज कर दी है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा जताया है।



