Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। अब कोर्ट परिसर में बिना पास किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसकी शुरुआत जमशेदपुर कोर्ट से की जा रही है।
सुरक्षा को और पुख्ता बनाने के लिए विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) लागू किया जा रहा है, जिसके तहत कोर्ट परिसर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होगा।
पांच जिलों की अदालतों में पहले चरण में लागू होगा VMS
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार पहले चरण में रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, धनबाद और देवघर की अदालतों में यह सिस्टम लागू किया जाएगा। सफल परीक्षण के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में विस्तार दिया जाएगा।
यह सिस्टम जैप‑आईटी द्वारा विकसित किया गया है। इसके तहत अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को RFID कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे उन्हें सुरक्षित और आसान प्रवेश मिलेगा।
आम लोगों की एंट्री कैसे होगी?
आम नागरिकों के लिए ई-पास व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा, जहां आगंतुक अपने केस से जुड़ी जानकारी देकर ई-पास के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन स्वीकृत होने पर ऑनलाइन ई-पास जारी होगा, जिसे दिखाकर ही कोर्ट परिसर में प्रवेश मिलेगा।
इसके अलावा मुख्य गेट पर पास बनाने की सुविधा भी रहेगी। इस व्यवस्था से:
- अनावश्यक भीड़ पर नियंत्रण
- संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
- समयानुसार आगंतुकों का डिजिटल रिकॉर्ड
- सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में सुविधा
मिलेगी।
सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
पिछले कुछ वर्षों में कोर्ट परिसरों में हुई गंभीर घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई थी:
- 30 नवंबर 2016: जमशेदपुर कोर्ट परिसर के बार एसोसिएशन भवन में अधिवक्ता उपेंद्र सिंह की ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी।
- 28 जनवरी 2023: अखिलेश सिंह गिरोह के सदस्य अंशु चौहान को कोर्ट परिसर से पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया गया था।
इन घटनाओं के बाद अब ‘नो पास, नो एंट्री’ और डिजिटल निगरानी के जरिए अदालतों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में यह अहम कदम माना जा रहा है।

