Khunti : शहर के मुख्य मार्गों और व्यस्त चौक-चौराहों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता जा रहा है। सुबह से देर रात तक गाय, बैल और अन्य मवेशी सड़कों के बीचों-बीच बैठे या घूमते दिखाई देते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
शहर के मेन रोड, बाजार क्षेत्र और प्रमुख संपर्क मार्गों पर अक्सर मवेशी सड़क के बीच में बैठे रहते हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या रास्ता बदलना पड़ता है, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कारण कई छोटे-बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
तोरपा के समाजसेवी संतोष जायसवाल का कहना है कि सड़क किनारे फेंके गए कचरे और सब्जियों के अवशेष खाने के लिए मवेशी बाजार क्षेत्र में पहुंच जाते हैं और घंटों तक सड़क पर डेरा जमाए रहते हैं। उन्होंने प्रशासन और पंचायत से आवारा मवेशियों को पकड़कर सुरक्षित गौशालाओं या निर्धारित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था करने की मांग की।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता एवं व्यवसायी प्रदीप केशरी ने कहा कि जिन पशुपालकों के मवेशी खुले में छोड़े जाते हैं, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
नागरिकों ने प्रशासन से यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमित अभियान चलाकर आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
तोरपा पूर्वी पंचायत के उपमुखिया राजू साहू ने कहा कि शहरी क्षेत्र के लिए यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले Simdega जिला प्रशासन ने सड़क पर घूम रहे मवेशियों को जब्त कर उनके मालिकों से जुर्माना वसूलने के बाद चेतावनी देकर छोड़ा था। उनका मानना है कि स्थानीय प्रशासन को भी इसी तरह की कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत की ओर से कई बार पशुपालकों से अपने मवेशियों को सड़कों पर खुला नहीं छोड़ने की अपील की गई, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।


