- जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड के नेता ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की, बयान के बाद बहस तेज।
Ranchi: जनजाति सुरक्षा मंच, झारखंड के नेता सोमा उरांव के एक बयान ने राज्य की राजनीति और सामाजिक विमर्श को नई बहस के केंद्र में ला दिया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में उन्होंने आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि आदिवासी हितों की रक्षा के लिए सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
सोमा उरांव ने अपने वक्तव्य में परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व और अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय में पारदर्शिता और संवैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन होना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट नीति अपनाने और जनजातीय समाज की भावनाओं का सम्मान करने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार, संस्कृति और पहचान से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनचर्चा होनी चाहिए तथा समाज को एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।
सोमा उरांव के इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विभिन्न प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। हालांकि, उनके आरोपों और दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।


