New Delhi : केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री Dharmendra Pradhan सोमवार को पहली बार संसद भवन पहुंचे। मकर द्वार पर उनके पहुंचते ही एनडीए सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया और उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर पूरे सम्मान के साथ संसद के भीतर लेकर गए।
सूत्रों के अनुसार, इस स्वागत के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी अंतरात्मा की आवाज पर लिया गया स्वैच्छिक फैसला था, जो उन्होंने छात्रों और देश के हित को ध्यान में रखते हुए किया। सरकार यह भी स्पष्ट करना चाहती है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनसे इस्तीफा नहीं मांगा था और उनका निर्णय किसी दबाव या असंतोष का परिणाम नहीं था।
राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि पार्टी का यह सार्वजनिक स्वागत धर्मेंद्र प्रधान के प्रति समर्थन का संदेश देने के साथ-साथ उनकी छवि को लेकर उठे सवालों का जवाब भी है। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों के नेता भी मकर द्वार के आसपास जुटकर अपनी रणनीति बनाते नजर आए।
इस्तीफे के बाद बीजेपी नेताओं ने की मुलाकात
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद Bharatiya Janata Party के कई वरिष्ठ नेता उनके आवास पहुंचे थे। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, Piyush Goyal, Jagat Prakash Nadda, Jitendra Singh, Nirmala Sitharaman, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta और भाजपा अध्यक्ष Nitin Navin शामिल थे। सभी नेताओं ने उनके इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन यह भी दोहराया कि उन्होंने यह फैसला स्वेच्छा से लिया है।
युवाओं के नाम पत्र में कही थी यह बात
धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं के नाम लिखे अपने पत्र में कहा था कि छात्रों के आंदोलन का राष्ट्रविरोधी ताकतें कोई गलत फायदा न उठा सकें, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि नीट पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी उन्होंने पहले दिन से स्वीकार की थी और सरकार की ओर से सभी आवश्यक कदम उठाए गए। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि नीट परीक्षा दोबारा कराई गई और उसके परिणाम भी जल्द घोषित किए गए।


