मुकेश रंजन
Ranchi : रांची राजधानी के पिठोरिया ग्राम पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचायत समिति सदस्य श्रवण गोप एवं उपमुखिया रामलगन महली ने रांची के उपायुक्त को आवेदन सौंपकर पंचायत में वित्तीय अनियमितता, पंचायत राज अधिनियम के कथित उल्लंघन तथा विकास योजनाओं में मनमानी का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

उपायुक्त को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान मुखिया मुन्नी देवी एवं पंचायत सचिव मनीष कुमार द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि से बिना पंचायत की विधिवत स्वीकृति और योजना पारित कराए लाभुकों का चयन कर विकास कार्य कराए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया पंचायत की पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना के विपरीत है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायत गठन के काफी समय बीत जाने के बावजूद अब तक कार्यकारिणी (स्थायी) समिति का गठन नहीं किया गया है, जो झारखंड पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। आरोप है कि समिति के अभाव में वार्ड सदस्यों को विकास योजनाओं की जानकारी नहीं दी जाती और न ही उनसे किसी प्रकार का प्रस्ताव या सुझाव लिया जाता है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्रामसभा की बैठकें नियमित एवं पारदर्शी तरीके से आयोजित नहीं की जा रही हैं। इससे पंचायत में विकास कार्यों की निगरानी और जनभागीदारी प्रभावित हो रही है। आवेदन में सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग की आशंका व्यक्त करते हुए इसे 73वें संविधान संशोधन तथा झारखंड पंचायती राज अधिनियम की मूल भावना के विरुद्ध बताया गया है।
आवेदन के माध्यम से उपायुक्त से मांग की गई है कि पिठोरिया पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए सभी विकास कार्यों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित मुखिया एवं पंचायत सचिव के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए तथा शीघ्र कार्यकारिणी समिति का गठन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि पंचायत का संचालन नियमों और पारदर्शिता के अनुरूप हो सके।
इस संबंध में आवेदन की प्रतिलिपि प्रखंड विकास पदाधिकारी, कांके को भी भेजी गई है।



