Patna : प्रधानमंत्री भारतीय जन-औषधि योजना के तहत संचालित जन-औषधि केंद्रों ने पिछले 12 वर्षों में बिहार के लोगों को दवाओं पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये की बचत कराई है। हालांकि सरकार इस संबंध में अलग से कोई आधिकारिक आंकड़ा संग्रहित नहीं करती, लेकिन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुमान के अनुसार यह बचत जेनरिक दवाओं के उपयोग से हुई है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी इसी अवधि में नागरिकों को करीब 45,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान लगाया गया है।
बिहार में 1,304 जन-औषधि केंद्र संचालित
वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री भारतीय जन-औषधि योजना की शुरुआत के समय बिहार में आधा दर्जन केंद्र भी नहीं थे। वर्तमान में राज्य में 1,304 जन-औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं।
सरकार ने सभी पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियों) को भी जन-औषधि केंद्र खोलने की अनुमति दी है। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है और संबंधित पैक्स की इच्छा पर निर्भर करता है।
देशभर के 846 पैक्स, जिनमें बिहार के 22 पैक्स भी शामिल हैं, में जन-औषधि केंद्र शुरू किए जा चुके हैं।
मार्च 2027 तक 25 हजार केंद्र खोलने का लक्ष्य
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का लक्ष्य मार्च 2027 तक देशभर में जन-औषधि केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 25,000 करना है। हालांकि राज्यों के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित नहीं किए गए हैं।
जुलाई 2026 तक देशभर में 20,149 जन-औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं, जबकि वर्ष 2014 में इस योजना की शुरुआत केवल 80 केंद्रों से हुई थी।
2,110 दवाएं और 315 चिकित्सा उत्पाद उपलब्ध
जन-औषधि केंद्रों पर वर्तमान में:
- 2,110 प्रकार की दवाएं
- 315 शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) उत्पाद एवं चिकित्सा उपकरण
उपलब्ध हैं।
इनमें हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी, गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल रोगों तथा न्यूट्रास्यूटिकल्स सहित लगभग सभी प्रमुख चिकित्सकीय श्रेणियों की दवाएं शामिल हैं।
ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50–80% तक सस्ती
जन-औषधि केंद्रों पर मिलने वाली जेनरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध हैं। इससे लोगों के इलाज पर होने वाला व्यक्तिगत खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) कम हुआ है और सस्ती दवाओं तक आम लोगों की पहुंच बढ़ी है।
पैक्स में भी बढ़ रहा जन-औषधि नेटवर्क
बिहार में जन-औषधि केंद्र खोलने के लिए:
- 420 पैक्स का चयन किया गया है।
- 302 पैक्स को स्वीकृति मिल चुकी है।
- 30 पैक्स को ड्रग लाइसेंस जारी किया गया है।
- 26 पैक्स को स्टोर कोड आवंटित किया गया है।
देशभर में अब तक 4,250 से अधिक पैक्स को जन-औषधि केंद्र खोलने की मंजूरी दी जा चुकी है।
बिहार में जिलावार जन-औषधि केंद्रों की संख्या
| जिला | केंद्र |
|---|---|
| पटना | 179 |
| मुजफ्फरपुर | 122 |
| पूर्वी चंपारण | 103 |
| बेगूसराय | 67 |
| सिवान | 64 |
| सीतामढ़ी | 61 |
| मधुबनी | 57 |
| दरभंगा | 56 |
| सारण | 55 |
| वैशाली | 51 |
| पश्चिम चंपारण | 50 |
| समस्तीपुर | 50 |
| गया | 42 |
| गोपालगंज | 34 |
| भागलपुर | 28 |
| सुपौल | 24 |
| भोजपुर | 22 |
| औरंगाबाद | 21 |
| नालंदा | 20 |
| खगड़िया | 18 |
| रोहतास | 18 |
| पूर्णिया | 17 |
| शिवहर | 17 |
| सहरसा | 15 |
| कटिहार | 14 |
| मुंगेर | 14 |
| मधेपुरा | 12 |
| अररिया | 11 |
| बक्सर | 10 |
| जहानाबाद | 9 |
| कैमूर | 9 |
| जमुई | 8 |
| लखीसराय | 8 |
| बांका | 7 |
| नवादा | 6 |
| शेखपुरा | 4 |
| अरवल | 4 |
| किशनगंज | 2 |
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि जन-औषधि योजना ने सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता बढ़ाकर आम लोगों के चिकित्सा खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।





