Mumbai : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर (नॉन-डेयरी पनीर) के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने यह फैसला जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है।
इस निर्णय के साथ महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है, जिसने एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार के अनुसार, अपराध की गंभीरता के आधार पर दोषियों को:
- 6 महीने तक की जेल
- 1 लाख रुपये तक का जुर्माना
हो सकता है।
यदि असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो दोषी को:
- आजीवन कारावास
- कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना
भी हो सकता है।
पूरी सप्लाई चेन पर लागू होगा प्रतिबंध
30 जुलाई को खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एनालॉग पनीर से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसमें शामिल हैं:
- निर्माण (Manufacturing)
- प्रोसेसिंग
- पैकेजिंग
- भंडारण
- परिवहन
- थोक बिक्री
- खुदरा बिक्री
- बिक्री के लिए प्रदर्शित करना
असली पनीर बताकर बेचने पर होगी कानूनी कार्रवाई
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचता है, तो इसे उपभोक्ताओं को गुमराह करना माना जाएगा।
ऐसे मामलों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि माना जाएगा और संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में भी उठ चुका था मुद्दा
एनालॉग पनीर का मुद्दा नया नहीं है। पिछले वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा में भी इस पर चर्चा हुई थी। उस समय कई विधायकों ने राज्य में एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। अब सरकार ने उस मांग को स्वीकार करते हुए पूरे राज्य में इस पर रोक लगा दी है।
उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से समझौता नहीं
महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध, एफडीए की सख्त निगरानी और जेल व भारी जुर्माने का प्रावधान इस दिशा में सरकार की कड़ी नीति को दर्शाता है।










