लखीसराय का भव्य संग्रहालय: ऐतिहासिक विरासत को संजोकर विकास की नई तस्वीर पेश कर रहा बिहार

लखीसराय का नया संग्रहालय जिले की प्राचीन विरासत, कला और संस्कृति को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बालगुदर में करीब 35.8 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह संग्रहालय आधुनिक सुविधाओं से लैस है और जिले के इतिहास को नई पहचान देने

लखीसराय का भव्य संग्रहालय
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  • लखीसराय का नया संग्रहालय जिले की प्राचीन विरासत, कला और संस्कृति को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बालगुदर में करीब 35.8 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह संग्रहालय आधुनिक सुविधाओं से लैस है और जिले के इतिहास को नई पहचान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

लखीसराय, 5 सितंबर : लखीसराय का नया संग्रहालय जिले की प्राचीन विरासत, कला और संस्कृति को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बालगुदर में करीब 35.8 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह संग्रहालय आधुनिक सुविधाओं से लैस है और जिले के इतिहास को नई पहचान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्राचीन विरासत को सहेजने की पहल

लखीसराय प्राचीन बौद्ध अवशेषों, पालकालीन मूर्तियों, शिलालेखों और पुरातात्विक स्थलों के लिए जाना जाता है। लाली पहाड़ी, नोंगरगढ़, बिछवे पहाड़ी और सिंगारपुर जैसे ऐतिहासिक स्थल जिले के गौरवशाली अतीत की कहानी बताते हैं।

इन्हीं धरोहरों को सुरक्षित रखने और आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से संग्रहालय का निर्माण किया गया है। इसका विधिवत उद्घाटन 6 फरवरी 2025 को हुआ था।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है संग्रहालय

करीब 1.5 एकड़ में फैले तीन मंजिला संग्रहालय में आधुनिक डिस्प्ले गैलरी, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, ऑडियो-विजुअल सुविधा, इनडोर और आउटडोर थियेटर सहित कई सुविधाएं हैं।

यहां आने वाले लोगों को लखीसराय के इतिहास और पुरातात्विक महत्व को एक ही स्थान पर करीब से जानने और समझने का मौका मिलेगा।

पर्यटन को मिल सकती है नई रफ्तार

अगस्त 2026 में उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने संग्रहालय की व्यवस्था की सराहना की थी। जिला प्रशासन को इसे प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। संग्रहालय के विकसित होने से लखीसराय में पर्यटन बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।

खुदाई में मिली प्राचीन प्रतिमा भी संग्रहालय में सुरक्षित

जून 2026 में संसार पोखर की खुदाई के दौरान करीब दो फीट ऊंची काले पत्थर की एक दुर्लभ प्राचीन प्रतिमा मिली थी। वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस प्रतिमा को भी लखीसराय संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।

लखीसराय के लोग क्या कहते हैं?

लखीसराय निवासी अभिनव का कहना है, “हमारे इलाके में कई ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं, लेकिन इनके बारे में पहले लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं थी। अब जब इन धरोहरों को संग्रहालय में सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जाएगा, तो आने वाली पीढ़ियों को भी अपने क्षेत्र के इतिहास और विरासत को समझने का मौका मिलेगा।”

अभिनव, निवासी लखीसराय
अभिनव, निवासी लखीसराय

स्थानीय निवासी रोहन कहते हैं, “लखीसराय की ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक संग्रहालय का निर्माण होना हमारे लिए खुशी और गर्व की बात है। इससे न केवल हमारी विरासत संरक्षित होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी भी अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को बेहतर तरीके से जान सकेगी।”

अभिनव, निवासी लखीसराय
अभिनव, निवासी लखीसराय
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