- भदानीनगर थाना क्षेत्र के पाली-सुद्दी पारगढ़ा गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की करीब 24 घंटे के भीतर हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। दो नाबालिग बच्चों की मौत के बाद उनकी मां की भी जान चली गई।
रामगढ़: भदानीनगर थाना क्षेत्र के पाली-सुद्दी पारगढ़ा गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की करीब 24 घंटे के भीतर हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। दो नाबालिग बच्चों की मौत के बाद उनकी मां की भी जान चली गई। घटना के बाद गांव में बीमारी को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं पैदा होने लगी थीं। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच शुरू की।
तीन मौतों के बाद गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टी
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा किया। टीम ने स्थानीय लोगों से घटना से जुड़ी जानकारी लेने के साथ-साथ उनकी स्वास्थ्य स्थिति की भी जांच की। इस दौरान करीब 75 ग्रामीणों के ब्लड सैंपल लिए गए।
इन सभी सैंपलों की मलेरिया और टाइफाइड की जांच कराई गई। विभाग की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार जांच में किसी भी व्यक्ति में इन दोनों बीमारियों की पुष्टि नहीं हुई है। सभी रिपोर्ट सामान्य बताई गई हैं।
15 और 9 साल के बच्चों की मौत के बाद मां ने भी तोड़ा दम
इस घटना ने ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी, क्योंकि एक ही परिवार में लगातार तीन मौतें हुईं। मृतकों में दो नाबालिग बच्चे रामकिशुन बेदिया (15) और साहिल बेदिया (9) शामिल हैं। दोनों बच्चों की मौत के बाद उनकी मां संगीता देवी की भी मौत हो गई।
करीब एक दिन के भीतर तीन लोगों की मौत की खबर फैलने के बाद गांव में भय और चिंता का माहौल बन गया। लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा कि कहीं किसी संक्रामक बीमारी के कारण तो यह घटना नहीं हुई।
मलेरिया और टाइफाइड की संभावना फिलहाल कम
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में तीनों मौतों के पीछे मलेरिया या टाइफाइड होने की संभावना कम नजर आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन बीमारियों में सामान्य तौर पर बुखार प्रमुख लक्षणों में शामिल होता है, जबकि मृतकों के मामले में बुखार का कोई स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आया था। बताया गया है कि तीनों लोगों में अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई दिए थे। इसलिए केवल शुरुआती लक्षणों के आधार पर मौत की वजह तय करना संभव नहीं है। विभाग अब अन्य संभावित कारणों की भी जानकारी जुटा रहा है।
इलाज और जांच की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि मृतकों का इलाज कहां कराया गया था और इलाज के दौरान उन्हें किन बीमारियों की आशंका बताई गई थी। इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि मलेरिया और टाइफाइड की जांच आखिर किस लैब में हुई थी और रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई थी।
इलाज करने वाले डॉक्टर की योग्यता और इलाज की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मरीजों की बीमारी की पहचान किस आधार पर की गई और उन्हें किस तरह का उपचार दिया गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुल सकता है मौत का कारण
संगीता देवी के शव का शुक्रवार शाम रामगढ़ में पोस्टमार्टम कराया गया था। अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही उनकी मौत की वास्तविक वजह को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल विभाग किसी एक बीमारी को मौत का कारण मानकर नहीं चल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों की नजर गांव की स्थिति पर बनी हुई है और जरूरत पड़ने पर आगे भी जांच की जा सकती है।
ग्रामीणों में डर न फैले, इसलिए निगरानी बढ़ाई गई
एक परिवार में लगातार तीन मौतों के बाद ग्रामीणों के बीच बीमारी को लेकर डर पैदा होना स्वाभाविक है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गांव में जांच और निगरानी शुरू की है। 75 लोगों के सैंपल की जांच में मलेरिया और टाइफाइड की पुष्टि नहीं होना फिलहाल राहत की बात है।
मौके पर पहुंची टीम में सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार, यक्ष्मा अधिकारी डॉ. स्वराज और डॉ. सत्यप्रकाश शामिल थे। टीम ने ग्रामीणों की स्थिति का जायजा लिया और घटना से जुड़ी जानकारियां भी जुटाईं। फिलहाल तीनों मौतों की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए गांव की स्थिति पर नजर बनाए रखी है।



